
● मुंबई
‘वाग्धारा’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘युद्ध नहीं, बुद्ध’ में वैचारिक चर्चा के साथ मानवता के पक्ष में सशक्त आवाज उठी। सांताक्रुज स्थित मौलाना आजाद भवन में आयोजित संगोष्ठी फिल्मकार-साहित्यकार डाॅ वागीश सारस्वत के संयोजन में हुई। इस सामयिक संगोष्ठी में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि मन और विचारों में भी लड़ा जाता है और उसी स्तर पर शांति की शुरुआत भी संभव है।
मुख्य अतिथि फिल्मकार रूमी जाफरी ने जीवन को एक सतत संघर्ष बताते हुए कहा कि सबसे बड़ा युद्ध इंसान का अपने भीतर होता है। संगोष्ठी की अध्यक्षता आध्यात्मिक प्रवक्ता वीरेंद्र याग्निक ने की। नौसेना के सेवानिवृत्त कमांडर भूषण दीवान ने अपने सैन्य अनुभव साझा किए। मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय ने रक्षा तंत्र और सैन्य संरचना पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समाजसेवी शिवजी सिंह, मनीषा जोशी, एडवोकेट भार्गव तिवारी, रंगकर्मी सगीर खान, वरिष्ठ पत्रकार शैलेन्द्र श्रीवास्तव, टीवी जर्नलिस्ट सुनील सिंह और लेखक विवेक अग्रवाल ने भी अपने विचारों से संगोष्ठी को समृद्ध किया। मंच संचालन अभिनेता रवि यादव ने किया। पत्रकार व कवि ओमप्रकाश तिवारी के गीतों को अभिनेत्री विनीता टंडन यादव ने स्वर दिए, वहीं महान कवि गोपाल दास नीरज की प्रसिद्ध कविता ‘अगर तीसरा युद्ध हुआ तो…’ का मार्मिक पाठ अमर त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में नंदिता माजी शर्मा, शिखा गोस्वामी, मीनू मदान और विशु सहित अनेक रचनाकारों ने युद्ध और शांति पर अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर प्रियंका सिंह, गोपी कृष्ण बुबना, एडवोकेट अनीस, एडवोकेट प्रभात, निर्देशक कमर हाजीपुरी और पत्रकार अनवर जैदी की उपस्थिति रही।
