■ मुख्यमंत्री ने मांगी कानूनी राय

● मुंबई
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण और ओपन कैटेगरी भर्ती से जुड़े हाल ही में लिए गए एक अहम फैसले की समीक्षा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैबिनेट के उस निर्णय को कानूनी जांच के लिए एडवोकेट जनरल के पास भेजने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत आरक्षित वर्ग के वे उम्मीदवार जो छूट (रिलैक्सशन ) का लाभ लेते हैं, उन्हें ओपन कैटेगरी की सीटों के लिए अयोग्य माना गया था।
यह मामला तब सामने आया जब शिवसेना मंत्री संजय राठोड ने इस नीति पर आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों का हवाला देते हुए इसे पुनर्विचार योग्य बताया। उन्होंने कैबिनेट बैठक में कहा कि यह नीति अदालत के कुछ निर्णयों से टकरा सकती है, इसलिए इसकी कानूनी जांच जरूरी है।
नई नीति में कहा गया था कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के वे उम्मीदवार जो आयु, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव या परीक्षा प्रयासों में छूट लेते हैं, वे केवल आरक्षित सीटों के लिए ही पात्र होंगे। हालांकि जो उम्मीदवार बिना किसी छूट के परीक्षा पास करेंगे, वे ओपन कैटेगरी में चयन के योग्य रहेंगे।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों में कुल आरक्षण 70 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिसके कारण ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा और अधिक कठिन हो गई है। सरकार का तर्क है कि छूट का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को ओपन कैटेगरी में शामिल करना असमान प्रतिस्पर्धा पैदा करता है।
