
● मुंबई
गेटवे ऑफ इंडिया परिसर में चलने वाली डीज़ल बोटों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बोटों में बदलने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस पहल का उद्देश्य ईधन बचत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
मत्स्यव्यवसाय और बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने प्रवीण दरेकर के साथ बैठक में बोट मालिकों को आर्थिक सहायता देने के लिए मुंबई बैंक के माध्यम से विशेष कर्ज योजना शुरू करने का सुझाव दिया।
फिलहाल गेटवे क्षेत्र में करीब 97 लाइसेंसधारी बोटें संचालित हो रही हैं, जो डीज़ल पर निर्भर हैं। इससे बोट मालिकों को हर महीने लगभग 1 लाख रुपए तक का ईंधन खर्च उठाना पड़ता है। इलेक्ट्रिक बोटों के उपयोग से यह खर्च कम होने के साथ प्रदूषण में भी कमी आएगी।
सरकार के अनुसार, इलेक्ट्रिक बोटों की कीमत 2.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपए तक है, इसलिए सहकारी संस्थाओं, निजी बोट मालिकों और समूहों के लिए कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए विशेष नीति बनाई जाएगी।
इस योजना के पहले चरण में 25 लाभार्थियों को शामिल किया जाएगा, जिनमें से 5 को पायलट प्रोजेक्ट के तहत इलेक्ट्रिक बोटें दी जाएंगी। मुंबई बैंक इस संबंध में जल्द ही एक विशेष पॉलिसी तैयार कर मंजूरी के लिए पेश करेगा।
यह पहल न केवल कोली समुदाय के आधुनिकीकरण में सहायक होगी, बल्कि मुंबई में पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को भी नई दिशा देगी।
