■ शहीद चंद्रशेखर आजाद के प्रपौत्र से रविंद्र मिश्रा की बातचीत

अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद आज भी देशभक्ति, साहस और बलिदान के सबसे प्रेरक प्रतीकों में गिने जाते हैं। उनके विचारों और संघर्षों ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी। इन्हीं आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से उनके प्रपौत्र तथा हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमित आजाद तिवारी इन दिनों मुंबई में संकल्प यात्रा पर हैं।
यह यात्रा लखनऊ में चंद्रशेखर आजाद की 151 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित करने के अभियान का हिस्सा है। देशभर में चल रहे इस अभियान के अंतर्गत अमित आजाद तिवारी विभिन्न राज्यों में जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। मुंबई प्रवास के दौरान भी उन्होंने अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को यह जानना आवश्यक है कि देश को आजादी दिलाने के लिए कितने वीर क्रांतिकारियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके अनुसार, उनकी टीम गांवों, कस्बों और शहरों में विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक पहुंचकर विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की जानकारी दे रही है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत अब तक करीब 1 लाख 80 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी की जा चुकी है।
सरकारी सहयोग के विषय में पूछे गए प्रश्न पर अमित आजाद तिवारी ने कहा कि सरकारें अक्सर क्रांतिकारियों के नाम और विचारों का उपयोग तो करती हैं, लेकिन उनके सम्मान में ठोस कार्य करने से पीछे हट जाती हैं।
उन्होंने प्रयागराज की यात्रा का एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में बलिदान स्थल पर उन्होंने लोगों को चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के साथ तस्वीरें लेते देखा, लेकिन अधिकांश लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि उनका जन्मस्थान या बलिदान स्थल कहां है। यहां तक कि एक महिला ने प्रतिमा की ओर इशारा करते हुए पूछा कि यह कौन हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास और क्रांतिकारियों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
अमित आजाद तिवारी ने एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब किसी ने आजाद जी से कहा कि उनके माता-पिता भूख से परेशान हैं, तब उन्होंने अपनी पिस्तौल की दो गोलियां देते हुए कहा था कि वह भारत माता की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसका महत्व व्यक्तिगत जीवन से भी बड़ा है।
उन्होंने कहा कि आज देश को फिर वैसी माताओं की आवश्यकता है, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना। उन्होंने जीजाबाई, पार्वती देवी, चकरानी देवी और विद्यावती देवी का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी माताओं के संस्कारों ने ही राष्ट्र को अमर सपूत दिए।
