- मुंबई
मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बार फिर संकट के मुहाने पर खड़ी है। बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट ) के कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है और 17 जून के बाद हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। इस मुद्दे को लेकर पूर्व महापौर इंद्रायणी नार्वेकर के नेतृत्व में कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आया है।

कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान, ग्रेच्युटी और अन्य आर्थिक लाभ लंबे समय से अटके हुए हैं। इसके चलते कई पेंशनभोगी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाल ही में आयोजित एक बैठक में 12 से अधिक संगठनों ने मिलकर आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया।
आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो 17 जून के बाद चक्का जाम और पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इससे मुंबई की बस सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं। बेस्ट की बसें रोजाना लाखों यात्रियों के लिए जीवनरेखा हैं, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर आम नागरिकों, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा। इससे पहले भी बेस्ट कर्मचारियों के आंदोलनों ने शहर की रफ्तार को धीमा किया है।
