▪️ फ्रेशर्स के लिए बदला रोजगार का परिदृश्य

▪️नई दिल्ली
पारंपरिक व्हाइट कॉलर नौकरियों की रफ्तार भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसे उभरते क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। जॉबस्पीक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई माह में एआई और एमएल से जुड़ी नौकरियों में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में कुल रोजगार वृद्धि केवल एक प्रतिशत रही।
रोजगार बाजार में आ रहे इस बदलाव को देखते हुए हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में विभिन्न हितधारकों के साथ बैठक आयोजित की गई। मंत्रालय का मानना है कि एआई को रोजगार के लिए खतरे के रूप में देखने के बजाय युवाओं को इस तकनीक के अनुरूप प्रशिक्षित और दक्ष बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
भारत का आईटी क्षेत्र सेवा अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और यह प्रतिवर्ष 245 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई एप-आधारित कंपनियां अब बड़ी संख्या में फ्रेशर्स की भर्ती करने के बजाय एआई तकनीकों में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं। इसका असर शुरुआती स्तर की नौकरियों पर दिखाई दे रहा है, जबकि उन्नत तकनीकी कौशल रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
एआई और मशीन लर्निंग क्षेत्र में करियर बनाने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को 30 लाख रुपये सालाना तक के आकर्षक पैकेज आसानी से मिल रहे हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं की संख्या अभी सीमित है, जिसके कारण कुशल पेशेवरों की मांग और अधिक बढ़ गई है।
जॉबस्पीक रिपोर्ट के अनुसार मई माह में हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में नौकरियों में पिछले वर्ष की तुलना में पांच प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) में रोजगार के अवसर आठ प्रतिशत बढ़े। इसके विपरीत बैंकिंग क्षेत्र में 15 प्रतिशत और टेलीकॉम सेक्टर में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य आईटी शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं को नौकरी पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके स्तर के कई कार्य अब एआई आधारित प्रणालियों द्वारा किए जा रहे हैं। यही कारण है कि चीन जैसे देश स्कूल स्तर से ही एआई और रोबोटिक्स शिक्षा को पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं।
