▪️वैज्ञानिकों ने बताई खोज की सबसे बड़ी चुनौती

▪️मुंबई
क्या हमारे सौरमंडल में एलियंस की मौजूदगी है? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों और आम लोगों के बीच जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। हालांकि अब तक एलियंस या उनकी उड़न तश्तरियों (UFO) के कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन एक नई स्टडी ने इस बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
खगोलशास्त्री टी. जोसेफ डब्ल्यू. लाजियो का मानना है कि यह संभावना पूरी तरह से खारिज नहीं की जा सकती कि किसी दूसरी उन्नत सभ्यता ने हमारे सौरमंडल में अपने रोबोटिक जांच यान या जासूसी उपकरण भेजे हों। उनके मुताबिक, इंसान ने अब तक सौरमंडल के बेहद छोटे हिस्से का ही गहराई से अध्ययन किया है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि अंतरिक्ष में कहीं कोई ऐसी तकनीक मौजूद नहीं है, जिसे हम अभी तक पहचान नहीं पाए हैं।
लाजियो का कहना है कि यह विचार सुनने में भले ही विज्ञान-कथा जैसा लगे, लेकिन इसे पूरी तरह काल्पनिक नहीं कहा जा सकता। इंसान खुद पायनियर-10, पायनियर-11, वॉयेजर-1, वॉयेजर-2 और न्यू होराइजंस जैसे मिशन अंतरिक्ष में भेज चुका है, जो भविष्य में सौरमंडल की सीमाओं से बाहर निकल जाएंगे।
ऐसे में यदि कोई दूसरी सभ्यता तकनीकी रूप से हमसे अधिक विकसित है, तो उसके लिए भी दूसरे सौरमंडलों तक पहुंचने वाले यान भेजना संभव हो सकता है। रिसर्च के अनुसार, ऐसे संभावित एलियन प्रोब्स निष्क्रिय रूप से अंतरिक्ष में तैर सकते हैं, सक्रिय रूप से डेटा एकत्र कर सकते हैं, किसी ग्रह या चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो सकते हैं या फिर स्वचालित बेस के रूप में मौजूद हो सकते हैं।
वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी प्राकृतिक अंतरिक्षीय वस्तु और संभावित कृत्रिम संरचना के बीच अंतर कैसे किया जाए। कई बार ऐसी वस्तुएं दिखाई देती हैं, जिन्हें शुरुआत में एस्टेरॉयड समझा जाता है, लेकिन बाद में वे मानव निर्मित अवशेष निकलती हैं।
वर्ष 2020 में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था, जब अंतरिक्ष में दिखी एक रहस्यमयी वस्तु को पहले एस्टेरॉयड माना गया, लेकिन बाद में पता चला कि वह 1966 में लॉन्च किए गए एक पुराने रॉकेट का हिस्सा थी।
इसी तरह 2017 में सौरमंडल में प्रवेश करने वाली रहस्यमयी वस्तु ‘ओमुआमुआ’ ने भी वैज्ञानिकों को उलझन में डाल दिया था। आज तक इस बात पर बहस जारी है कि वह एक असामान्य प्राकृतिक पिंड था या किसी दूसरी सभ्यता का खोजी यान।
हालांकि एलियंस या उनकी तकनीक के अस्तित्व का अब तक कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि सौरमंडल की विशालता और हमारी सीमित खोज क्षमता को देखते हुए ऐसी संभावनाओं को पूरी तरह नकारना भी जल्दबाजी होगी।
