
▪️ नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि निर्धारित और सुरक्षित फुटपाथों पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(डी) में निहित आवागमन की स्वतंत्रता तथा अनुच्छेद 21 के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि नागरिकों को सुरक्षित, सुगम और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ उपलब्ध कराना राज्य सरकारों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। अदालत ने टिप्पणी की कि शहरी विकास के दौरान मोटर वाहनों को प्राथमिकता दी गई, जबकि पैदल यात्रियों की जरूरतों की लंबे समय तक अनदेखी होती रही। इसके कारण फुटपाथों पर अतिक्रमण, अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी समस्याएं बढ़ीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पैदल यात्रियों के अधिकारों को किसी भी स्थिति में वाहनों की सुविधा के नाम पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। स्थानीय प्रशासन को फुटपाथों का निर्माण, रखरखाव और संरक्षण सुनिश्चित करना होगा। यदि किसी नागरिक के इस अधिकार का उल्लंघन होता है तो वह संबंधित प्राधिकरणों के खिलाफ कानूनी राहत और मुआवजे की मांग भी कर सकता है।
यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक पांच वर्षीय बच्चे की मृत्यु हो गई थी। अदालत के इस फैसले को पैदल यात्रियों की सुरक्षा और मानव-केंद्रित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
