- जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का बन रहे सहारा

▪️मुंबई
भारतीय सेना की पुरानी वर्दियां अब कबाड़ में नहीं जा रहीं, बल्कि ज़रूरतमंद बच्चों के लिए मजबूत और टिकाऊ स्कूल बैग बनकर शिक्षा की नई उम्मीद जगा रही हैं। सेना की वर्दी का सम्मान बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सेवानिवृत्त मेजर जनरल आशीम कोहली ने अपनी बेटी के साथ मिलकर एक अनूठी पहल शुरू की है। इस अभियान के तहत सेना की अनुपयोगी वर्दियों को रीसायकल कर स्कूल बैग और अन्य उपयोगी वस्तुओं में बदला जा रहा है।
ड बेटर इंडिया के अनुसार 37 वर्षों तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले मेजर जनरल कोहली का मानना है कि वर्दी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि देशभक्ति, अनुशासन और बलिदान का प्रतीक है। इसलिए सेवा समाप्त होने के बाद भी इसकी गरिमा बनी रहनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने पुरानी वर्दियों को नया जीवन देने का अभियान शुरू किया।

इस पहल के अंतर्गत देशभर से सेना के जवान और अधिकारी अपनी पुरानी वर्दियां भेजते हैं। अच्छी स्थिति में मौजूद कपड़ों को साफ कर उनकी सिलाई से मजबूत स्कूल बैग तैयार किए जाते हैं, जबकि अनुपयोगी हिस्सों का उपयोग मास्क, डायरी और अन्य उपयोगी वस्तुएं बनाने में किया जाता है। इस प्रक्रिया में कपड़े का लगभग हर हिस्सा उपयोग में लाया जाता है, जिससे वस्त्र अपशिष्ट भी कम होता है।
तैयार बैग भारतीय सेना और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से सीमावर्ती, दूरदराज़ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इन बैगों के माध्यम से बच्चों को केवल पढ़ाई का साधन ही नहीं, बल्कि सेना के प्रति सम्मान और प्रेरणा का संदेश भी मिलता है।
यह पहल सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है। एक ओर जहां इससे पुरानी वर्दियों का सम्मानजनक उपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों ज़रूरतमंद बच्चों को स्कूल बैग उपलब्ध कराकर उनकी शिक्षा को नई उड़ान दी जा रही है। सेना की यह पहल साबित करती है कि देश सेवा केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए किए गए ऐसे कार्यों से भी जारी रह सकती है।
