- मुंबई। महाराष्ट्र में प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र स्वतंत्रता धर्म अधिनियम, 2026’ को आखिरकार राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, जिससे इसके लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। अब राज्य सरकार की अधिसूचना जारी होते ही यह कानून प्रभावी हो जाएगा। बजट सत्र में पारित इस कानून को आमतौर पर ‘एंटी-कन्वर्जन लॉ’ कहा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस विधेयक को अपनी स्वीकृति दे दी है और राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने इसे आगे की प्रक्रिया के लिए महाराष्ट्र सरकार को भेज दिया है। अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर सख्त प्रावधान लागू होंगे।
कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित प्राधिकरण को पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है। विशेष रूप से, बार-बार अपराध करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल की सजा तय की गई है।
राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून जबरन, प्रलोभन या धोखे से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है। वहीं, विपक्ष इस कानून को लेकर सरकार पर व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का आरोप लगा रहा है। ऐसे में अधिसूचना के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर टकराव और तेज होने की संभावना है।
