▪️ सूर्यकांत उपाध्याय

घुप्प अंधेरी रात थी। एक व्यक्ति नदी में कूदकर आत्महत्या करने का विचार कर रहा था। वर्षा के दिन थे और नदी पूरे उफान पर थी। आकाश में बादल घिरे थे तथा रह-रहकर बिजली चमक रही थी। वह उस देश का एक बहुत बड़ा धनी व्यक्ति था, लेकिन अचानक हुए भारी घाटे से उसकी सारी संपत्ति चली गई थी। उसके भाग्य का सूरज मानो डूब चुका था। चारों ओर निराशा ही निराशा थी। उसे अपना भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा था।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। अंततः उसने अपना जीवन समाप्त करने का निश्चय कर लिया। जैसे ही वह नदी में कूदने के लिए चट्टान के किनारे खड़ा होकर अंतिम बार ईश्वर का स्मरण करने लगा, तभी दो बुजुर्ग, किंतु मजबूत बाँहों ने उसे रोक लिया।
बिजली की चमक में उसने देखा कि एक वृद्ध साधु उसे पकड़े हुए हैं। वृद्ध ने उससे उसकी निराशा का कारण पूछा। उसे किनारे लाकर उसकी पूरी कथा सुनी और फिर मुस्कराकर बोले, ‘तो तुम यह स्वीकार करते हो कि पहले तुम सुखी थे।’
सेठ बोला, ‘हाँ, मेरे भाग्य का सूर्य पूरे तेज के साथ चमक रहा था। चारों ओर मान-सम्मान और संपदा थी। अब जीवन में अंधकार और निराशा के अतिरिक्त कुछ भी शेष नहीं बचा है।’
वृद्ध फिर मुस्कराए और बोले, ‘दिन के बाद रात आती है और रात के बाद फिर दिन। जब दिन सदा नहीं टिकता, तो रात भी कैसे टिक सकती है? परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। इसे ध्यान से सुनो और समझ लो।
जब तुम्हारे अच्छे दिन हमेशा के लिए नहीं रहे, तो बुरे दिन भी हमेशा नहीं रहेंगे। जो इस सत्य को जान लेता है, वह सुख में अधिक प्रसन्न नहीं होता और दुःख में अधिक व्यथित नहीं होता।’
उसका जीवन उस अडिग चट्टान के समान हो जाता है, जो वर्षा हो या धूप, हर परिस्थिति में समान रूप से अटल बनी रहती है। जो व्यक्ति सुख और दुःख दोनों को समभाव से स्वीकार कर लेता है, समझो उसने स्वयं को जान लिया।
सुख-दुःख तो आते-जाते रहते हैं। यही प्रकृति की गति है, यही ईश्वर का विधान है। जो न आता है और न जाता है, वह है हमारा वास्तविक अस्तित्व। इसी अस्तित्व में स्थिर हो जाना ही समत्व है।
ज़रा सोचिए, यदि किसी व्यक्ति ने जीवन में केवल सुख ही देखा हो, उसकी हर इच्छा पूरी होने से पहले ही पूरी हो जाती हो, तो क्या वह किसी उपहार या उपलब्धि की वास्तविक खुशी का अनुभव कर पाएगा?
यदि दुःख न आए, तो सुख का वास्तविक स्वाद भी कैसे समझ में आएगा? जो इस शाश्वत सत्य को जान लेता है, उसका जीवन मोह और बंधनों से मुक्त हो जाता है।
