
▪️ रवीन्द्र मिश्रा
रक्षाबंधन का पर्व करीब आते ही भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीय रिश्ते का प्रतीक राखी बाजार गुलजार हो गया है। इस बार बाजार में हल्दी-कुंकुम रंग की राखियों का खासा आकर्षण देखने को मिल रहा है और इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
राखी निर्माता संजय जैन (अशोक आर्ट) ने बताया कि बाजार में हजारों किस्म की राखियां उपलब्ध हैं, लेकिन इस वर्ष हल्दी रंग की राखियां ग्राहकों को अधिक पसंद आ रही हैं। रेशमी कॉटन धागे से बनी सुनहरी और हल्की पीली राखियां कलाई पर आकर्षक लगती हैं और मध्यम वर्गीय परिवारों में इनकी अच्छी मांग है।
उन्होंने बताया कि विदेशों में रहने वाले भाई-बहनों में भी राखी को लेकर खासा उत्साह है। अमेरिकन डायमंड और कार्ड पैक वाली राखियां पसंद की जा रही हैं। बच्चों के लिए लाइटिंग, फुटबॉल, क्रिकेट, कार्टून कैरेक्टर, लाइट एवं म्यूजिक वाली राखियां आकर्षण का केंद्र हैं।
आधुनिक युवतियां पेंडल वाली राखियां पसंद कर रही हैं, जबकि भैया-भाभी पूजा थाली, कनकावटी और लुंबा राखियों की भी मांग है। वैष्णव संप्रदाय में श्रावण माह के झूला श्रृंगार के लिए हिंडोला राखी पसंद की जा रही है। रुद्राक्ष और यूवी प्रिंट वाली राखियां भी सदाबहार बनी हुई हैं।
संजय जैन ने बताया कि राखी निर्माण एक कुटीर उद्योग है, जिसमें जरूरतमंद महिलाएं घरेलू काम से समय निकालकर राखियां बनाती हैं। हालांकि मजदूरी कम होने के कारण यह उनके लिए अतिरिक्त आय का साधन है। वहीं खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति, सोने-चांदी के बढ़े दाम और प्लेटिंग महंगी होने से राखियों की कीमत करीब 10 प्रतिशत बढ़ गई है।
