
अभिनेत्री और प्रसिद्ध टेलीविजन प्रस्तोता मंदिरा बेदी, जो भारत में क्रिकेट प्रसारण की पहली महिला चेहरों में गिनी जाती हैं, आज भी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक विश्वकप जीत की खुशी में सराबोर हैं। वे मुस्कुराते हुए कहती हैं – “अब भी इस जीत से बाहर नहीं आ पा रही हूं। यह वास्तव में दशकों की मेहनत और विकास का चरम है।”
मंदिरा भावुक होकर बताती हैं, “कभी इन महिलाओं के मैचों में मुश्किल से 20–25 दर्शक हुआ करते थे और आज वही टीम डी.वाई. पाटिल स्टेडियम जैसे विशाल मैदान को दर्शकों से भर देती है। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी मजबूत टीमों को मात देकर जो सफर उन्होंने तय किया है, वह सचमुच प्रेरणादायक है। देश में महिला खेलों के लिए उन्होंने जो नई दिशा बनाई है, उस पर गर्व होता है।”
वह स्वीकार करती हैं कि इस उपलब्धि का वास्तविक अहसास धीरे-धीरे दिल में उतर रहा है, “उन्हें हर जगह सम्मान मिलता देखना, आम घरों में पहचाना जाना, और वर्षों की मेहनत का प्रतिफल पाना, यह बेहद सुखद है।”
इस जीत के साथ मंदिरा बेदी के महिला क्रिकेट के शुरुआती दौर में किए गए योगदान की बातें भी फिर चर्चा में हैं। सन् 2003 से 2005 के बीच, जब महिला क्रिकेट टीम संसाधनों की कमी से जूझ रही थी, मंदिरा ने निजी तौर पर आर्थिक सहायता दी थी। मुस्कुराते हुए वे कहती हैं , “दो दशक पुरानी यह बात फिर से सामने आने पर थोड़ा संकोच भी होता है। उस समय टीम को मदद की जरूरत थी, और मैंने बस अपनी क्षमता के अनुसार योगदान किया था।”
उनके शब्दों में “आज भारतीय महिला क्रिकेट टीम जिस ऊंचाई पर खड़ी है, वह हम सभी के लिए गर्व का विषय है। यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं बल्कि हर उस सपने की जीत है जो कभी असंभव माना जाता था।”
