
■ विज्ञान ने बताया असली कारण
● नई दिल्ली
किसी गीत की ऊँची उड़ान, किसी कविता की मार्मिक पंक्ति या किसी प्रेरक भाषण का चरम अचानक शरीर में एक सिहरन दौड़ जाती है और रोंगटे खड़े हो जाते हैं। इस अनुभव को विज्ञान की भाषा में फ्रिसन कहा जाता है। अब कई वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह केवल भावुकता नहीं बल्कि एक न्यूरो-बायोलॉजिकल प्रतिक्रिया है।
मैकगिल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ऐन-जोली ब्लड और रॉबर्ट जटोर ने PET स्कैन के जरिए यह पाया कि जब कोई संगीत अत्यधिक भावनात्मक बिंदु पर पहुँचता है तो हमारे दिमाग का रिवार्ड सिस्टम अचानक सक्रिय हो जाता है। शोध में देखा गया कि फ्रिसन के दौरान दिमाग के उन हिस्सों में गतिविधि बढ़ जाती है, जहाँ आनंद का न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन रिलीज़ होता है।
इस शोध को Nature Neuroscience में प्रकाशित किया गया था, जिसमें वैज्ञानिकों ने साफ बताया था कि ‘तीव्र संगीत सुख’ सीधे दिमाग के इनाम और भावना से जुड़े क्षेत्रों को सक्रिय करता है।

संगीत मनोविज्ञान के प्रसिद्ध शोधकर्ता डेविड ह्यूरन ने अपनी किताब Sweet Anticipation में बताया कि फ्रिसन अक्सर तब होता है जब संगीत श्रोता की उम्मीदों को तोड़ता है जैसे अचानक सुर बदल जाना या किसी लाइन का भावनात्मक रूप से ऊँचे स्तर पर पहुँच जाना। ह्यूरन के अनुसार, “संगीत में अनपेक्षित बदलाव दिमाग की संज्ञानात्मक अपेक्षाओं को चुनौती देते हैं और शरीर उसी उत्तेजना को सिहरन के रूप में व्यक्त करता है।”
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना के अध्ययन में पाया गया कि जो लोग फ्रिसन का अनुभव अधिक करते हैं, उनके दिमाग में ऑडिटरी कॉर्टेक्स और इमोशनल प्रोसेसिंग एरिया के बीच कनेक्टिविटी अधिक मजबूत होती है। यह अध्ययन PNAS में प्रकाशित हुआ था, जिसमें वैलेरी सलीमपुर और उनकी टीम ने बताया कि “संगीत का मूल्य समझने में इन दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद ही फ्रिसन को ट्रिगर करता है।”
वैज्ञानिकों के अनुसार यह अनुभव सभी में समान नहीं होता क्योंकि दिमाग की संरचना, न्यूरल कनेक्टिविटी और भावनात्मक प्रतिक्रिया-शक्ति हर व्यक्ति में अलग होती है। जिनमें भावना और श्रवण दोनों के नेटवर्क अधिक जुड़े होते हैं, उनमें फ्रिसन तेज़ और अधिक बार महसूस होता है।
