
● रविंद्र मिश्र@ मुंबई। कॉरपोरेट जगत की नौकरी और अपना घर-बार छोड़कर सत्य की खोज में निकले स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज इन दिनों अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के जंगलों में साधना कर रहे हैं। पालघर जिले के वज्रेश्वरी के निकट मेढे गांव स्थित परशुराम तपोवन आश्रम में महाराज जी अपनी तपस्या में लीन हैं।
तेलंगाना स्थित बासर के ब्रह्मेश्वर पीठ के दशनामी अखाड़ा से जुड़े इस संत ने अपने भक्तों को वैराग्य का संदेश देते हुए बताया कि काशी–प्रयाग के बीच स्थित एक ब्राह्मण परिवार में इनका जन्म हुआ। कभी यहां के राज-परिवार से भी संबंध थे। आगरा विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री लेने के बाद कॉरपोरेट जगत में नौकरी की। देश-विदेश की यात्राएं कीं पर भौतिक सुखों से मन उचट गया और आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ता गया।
उन्होंने कहा, “घर-द्वार छोड़, प्रभु की सेवा और मानव कल्याण के उद्देश्य से दशनामी अखाड़ा से दीक्षा लेकर नागा साधु बन तपस्या कर रहा हूं।”
महाराष्ट्र के जंगलों में साधना करने के कारण पर स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज का कहना है कि यह भूमि संतों और वीरों की भूमि है, जिसकी मिट्टी आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है।
चेहरे पर दिव्य तेज और मधुर वाणी में आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले इस संत के दर्शन मुंबई के कुछ समाजसेवियों को तब हुए जब वे मेढे गांव में गुरुकुल एवं वृद्धाश्रम के लिए उपयुक्त स्थान की खोज में निकले थे।
इस अवसर पर समाजसेवक दिनेश डोगरा, डॉ. राधेश्याम गुप्ता, श्रीमती प्रीति शर्मा, श्रीमती निर्मला भंडारे, बबलू तिवारी, पत्रकार रवीन्द्र मिश्रा, हर्ष सहित कई भक्त उपस्थित थे।
