■ दिल्ली में ‘नवयुग खादी’ फैशन शो
■ 3 दिसंबर तक चलेगी प्रदर्शनी

● नई दिल्ली
राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी, प्रगति मैदान में शनिवार 29 नवंबर को आयोजित नवयुग खादी फैशन शो में “नए भारत की नई खादी” आकर्षण का केंद्र बना। कार्यक्रम का उद्देश्य खादी को आधुनिक, रचनात्मक और समकालीन रूप में प्रस्तुत करना था। इससे एक दिन पहले 28 नवंबर को प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ और खादी नॉलेज पोर्टल के द्वितीय संस्करण का विमोचन किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन मनोज कुमार ने खादी परिधानों की डिजाइन और खादी शिल्पकारों की निष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी एक कपड़ा भर नहीं बल्कि देशभक्ति, आधुनिक भारतीय जीवनशैली और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने पीएम की प्रेरक पंक्ति का उल्लेख किया- “खादी फॉर नेशन, खादी फॉर फैशन, खादी फॉर ट्रांसफॉर्मेशन”।

चेयरमैन ने कहा कि आज का खादी बापू की विरासत को आगे बढ़ाते हुए वैश्विक फैशन में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। यह अब केवल गांवों तक सीमित नहीं बल्कि शहरों, फैशन रैंप और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी स्वीकार किया जा रहा है। नई पीढ़ी के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है और यह रोजगार, पर्यावरणीय स्थिरता और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।
केवीआईसी, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर खादी, निफ्ट और एफडीसीआई द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस शो में विभिन्न खादी परिधानों व उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। देशभर से आए खादी संस्थानों व शिल्पकारों ने रैंप पर वॉक कर सबका दिल जीता। केवीआईसी चेयरमैन भी शिल्पकारों के साथ रैंप पर उतरे, यह संदेश देते हुए कि खादी की असली ताकत उसके कारीगर हैं।

प्रदर्शनी में ओडिशा की इकट, असम की एरी सिल्क, गुजरात की तंगलिया, कर्नाटक का सिल्क, बंगाल व तेलंगाना की बुनाई तथा बिहार की पारंपरिक कारीगरी एक ही मंच पर दिखाई गई, जो “नए भारत की नई खादी” की सशक्त झलक थी।
यह कार्यक्रम 3 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें प्रदर्शनी, बिक्री और हाथ से काताई, नैचुरल डाईंग व साड़ी ड्रेपिंग की कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। यहां आगंतुकों को खादी को करीब से समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
