■ दत्त-तत्त्व की दिव्य ऊर्जा के अनुभव का अद्वितीय अवसर

● धीरज मिश्र @मुंबई
हिंदू धर्म में भगवान दत्तात्रेय के प्राकट्य दिवस को दत्तात्रेय जयंती के रूप में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है। यह पावन पर्व हर वर्ष मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को आता है। वर्ष 2025 में दत्तात्रेय जयंती आज 4 दिसंबर, गुरुवार को है। इसे दत्त जयंती भी कहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों के संयुक्त अवतार माने जाते हैं। ऐसा विश्वास है कि उनकी उपासना करने से त्रिदेवों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा की यह तिथि साधकों के लिए आध्यात्मिक उन्नति, सिद्धि और कल्याण का विशेष अवसर मानी गई है।

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि अत्रि और माता अनुसूया के यहाँ भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ। वे अपने 24 गुरुओं की परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध हैं। पृथ्वी, आकाश, वायु, जल, सूर्य, समुद्र, हाथी, हिरण, कबूतर, पतंगा और पिंगला वेश्या सहित प्रकृति और जीवन से जुड़े 24 स्रोतों से उन्होंने ज्ञान ग्रहण किया था।
माना जाता है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा की संध्या, मृग नक्षत्र में भगवान दत्तात्रेय का अवतरण हुआ, इसी कारण सभी प्रमुख दत्तक्षेत्रों में इस दिन विशेष उत्सव आयोजित किए जाते हैं।
- भगवान दत्त के प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र
दत्त जयंती पर दत्त-तत्त्व का प्रभाव सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक सक्रिय रहता है। इस दिन श्रद्धा, जप और पूजन का विशेष फल प्राप्त होता है। शास्त्रों में दत्त जयंती मनाने के लिए कोई कठोर अनुष्ठान निर्धारित नहीं, परंपरा है कि इस पर्व से सात दिन पहले गुरुचरित्र का पारायण किया जाता है, जिसे गुरुचरित्र-सप्ताह कहा जाता है।

भजन, कीर्तन और विशिष्ट उपासना की पद्धतियाँ इस उत्सव का प्रमुख अंग हैं। महाराष्ट्र के औदुंबर (गूलर), नरसोबाची वाडी, गाणगापुर और गुजरात के गिरनार पर्वत जैसे दत्तक्षेत्रों में दत्त जयंती विशेष भव्यता से मनाई जाती है। तमिलनाडु में भी यह परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। कई ब्राह्मण परिवार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी से आरंभ होने वाली दत्त नवरात्रि का पालन करते हैं।
- भगवान दत्तात्रेय के मंत्र और स्तोत्र
भगवान दत्तात्रेय के कई मंत्र और स्तोत्र हैं जो बहुत प्रभावी हैं। ॐ द्रां ॐ, श्री दत्त जय दत्त, ॐ नमो भगवते दत्तात्रेयाय, दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा जैसे मंत्र बहुत लाभकारी हैं। इसके अतिरिक्त परम् पूज्य वासुदेवानंद सरस्वती रचित जयलाभ स्तोत्र, दत्तात्रेय कवच, परमपूज्य रंगावधूत स्वामी कृत दत्त बावनी स्तोत्र और दत्त माला मंत्र सहित कई स्तोत्र हैं जिसका पाठ करने से भक्तों को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं।
कहा गया है कि भगवान दत्त के नामजप से हमारे चारों ओर एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच निर्मित होता है और पूर्वजों से जुड़े कष्टों से रक्षा प्राप्त होती है। ‘श्री गुरुदेव दत्त’ नाम का जप अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
