■ जेम्स वेब की खोज ने ब्रह्मांड को चौंकाया

● नई दिल्ली।
नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष की गहराइयों में एक ऐसी दुनिया खोजी है, जिसने वैज्ञानिकों की समझ को चुनौती दे दी है। यह ग्रह गोल नहीं है, जैसा अब तक ब्रह्मांड में देखे गए ग्रह होते आए हैं। इसका आकार नींबू या रग्बी बॉल जैसा बताया जा रहा है। इस रहस्यमयी ग्रह को PSR J-2322-2650b नाम दिया गया है और इसे ‘ब्लैक विडो’ सिस्टम का हिस्सा माना जा रहा है।
अब तक पृथ्वी, बृहस्पति सहित सभी ज्ञात ग्रह लगभग गोलाकार रहे हैं। ऐसे में यह टेढ़ा-मेढ़ा ग्रह वैज्ञानिकों के लिए हैरानी का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके अजीब आकार के पीछे इसके तारे का अत्यंत शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण जिम्मेदार है। यह ग्रह अपने तारे के बेहद नज़दीक है और महज़ आठ घंटे में उसका एक चक्कर पूरा कर लेता है। इतनी नजदीकी के कारण तारे की तीव्र खिंचाव शक्ति ने इस ग्रह को पूरी तरह खींच दिया है। इसी प्रक्रिया को ‘टाइडल फोर्स’ कहा जाता है।
जहां पानी नहीं, हीरे बरसने की संभावना
इस ग्रह का वातावरण भी उतना ही विचित्र है, जितना इसका आकार। पृथ्वी की तरह यहां ऑक्सीजन या नाइट्रोजन नहीं पाई गई। वैज्ञानिकों को इसके वातावरण में हीलियम और कार्बन की अत्यधिक मात्रा मिली है। शिकागो यूनिवर्सिटी की शोध टीम के प्रमुख माइकल झांग के अनुसार यह अब तक देखे गए ग्रहों से बिल्कुल अलग तरह का वातावरण है। यहां न तो पानी है और न ही मीथेन जबकि कार्बन-2 और कार्बन-3 के अणु मौजूद हैं।
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि इस ग्रह पर कार्बन के बादल बनते होंगे। जब ये बादल बरसते होंगे तो बारिश पानी की नहीं होती होगी। अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण यहां हीरों की बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। कल्पना कीजिए, एक ऐसी दुनिया जहां ज़मीन पर हीरे बिखरे हों।
मुर्दा तारे का खतरनाक आकर्षण
यह ग्रह जिस तारे की परिक्रमा कर रहा है, वह कोई साधारण तारा नहीं है। वह एक पल्सर है, यानी एक मृत तारा। इसे ‘ब्लैक विडो पल्सर’ सिस्टम कहा जाता है। नाम उस मकड़ी से लिया गया है जो अपने साथी को खा जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पल्सर भी धीरे-धीरे अपने साथी ग्रह को निगल रहा है। जेम्स वेब की यह खोज केवल एक नए ग्रह की पहचान नहीं है, यह ब्रह्मांड के नियमों को समझने की दिशा में एक बड़ी चुनौती भी है। अंतरिक्ष अब भी अपने रहस्यों से हमें लगातार चौंकाता जा रहा है।
