● राम नाम से राहत की राह

■ आत्मन मिश्र
लखनऊ की एक साधारण गली से उठी यह कथा आज देशभर में करुणा, आस्था और निःस्वार्थ सेवा का संदेश दे रही है। मूलतः लखनऊ निवासी, सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले और हनुमान जी को इष्ट मानने वाले मानव देसाई का जीवन संघर्ष से साधना और साधना से सेवा की प्रेरक यात्रा बन चुका है।
आरंभिक दिनों में मानव देसाई का जीवन किसी सामान्य नागरिक से भिन्न नहीं था। चाय का व्यापार किया पर परिस्थितियां प्रतिकूल रहीं। आर्थिक संकट गहराया और भीतर एक रिक्तता ने जगह बनाई। इसी आत्मसंघर्ष के दौर में उन्होंने आत्मचिंतन का मार्ग चुना और अयोध्या की ओर प्रस्थान किया मानो नियति ने वहीं बुलाया हो।
हनुमान गढ़ी और श्रीराम जन्मभूमि के दर्शन के दौरान उनकी भेंट एक संत से हुई। बिना किसी विस्तृत संवाद के संत ने उनके मनोभाव और जीवन-संघर्ष को शब्दों में रख दिया। वहीं मानव देसाई को राम नाम की शक्ति का बोध हुआ और एक ऐसी साधना-पद्धति का ज्ञान मिला, जो शारीरिक पीड़ा से मुक्ति का मार्ग दिखाती थी। उसी क्षण उन्हें अनुभव हुआ कि उनका जीवन दूसरों के दुख हरने के लिए समर्पित है।
अयोध्या से लौटकर उन्होंने ‘मानव स्वास्थ्य सेवा संस्थान’ की स्थापना की। लखनऊ के एक हनुमान मंदिर में हर मंगलवार और शनिवार निःशुल्क सेवा आरंभ हुई। राम नाम के उच्चारण के साथ गुरुप्रदत्त विद्या द्वारा घुटनों, कमर, गर्दन और अन्य शारीरिक कष्टों में लोगों को राहत देने लगे। धीरे-धीरे यह सेवा आस्था का केंद्र बनी और लोगों के अनुभवों के साथ इसकी चर्चा फैलती गई।
सेवा को व्यापक स्वरूप देने के संकल्प के साथ मानव देसाई साइकिल लेकर ‘दर्दमुक्त भारत अभियान’ पर निकल पड़े। उद्देश्य स्पष्ट था, घर-घर तक राम नाम की शक्ति और पीड़ामुक्त जीवन का संदेश पहुंचाना। जब साइकिल साथ नहीं दे सकी, तब भी संकल्प अडिग रहा; उन्होंने पैदल यात्रा जारी रखी।
काशी, प्रयागराज, विंध्याचल जैसे तीर्थों में उन्होंने संतों और श्रद्धालुओं की निःशुल्क सेवा की। हाल ही में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दिल्ली–वृंदावन यात्रा के दौरान भी मानव देसाई सक्रिय रहे और बड़ी संख्या में भक्तों को सेवा प्रदान की।
वर्तमान में वे मुंबई के अंधेरी क्षेत्र में हैं, जहां बागेश्वर धाम की कथा के दौरान स्थानीय लोगों की निःशुल्क सेवा कर रहे हैं। महानगर की तेज रफ्तार जिंदगी में दर्द और तनाव से जूझ रहे लोगों के लिए यह सेवा संबल बन रही है। राम नाम के साथ दी जा रही यह साधना आस्था और अनुभव का सशक्त संगम बनती जा रही है।
मानव देसाई ने अपनी इस पहल को ‘राम नाम थेरेपी’ और अभियान को ‘दर्दमुक्त भारत’ नाम दिया है। उनका सपना है राम कृपा से ऐसा आश्रम स्थापित करना, जहां जरूरतमंदों को निःशुल्क आवास और भोजन उपलब्ध हो। लक्ष्य उपचार तक सीमित नहीं, सेवा, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से देश को पीड़ामुक्त बनाना है।
मानव देसाई के कार्य और अभियान से जुड़ी जानकारी ‘दर्दमुक्त भारत’ नाम से इंस्टाग्राम आईडी और यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है। संपर्क: 9335707396।
यह यात्रा कब और कितनी दूर तक पहुंचेगी, यह समय बताएगा; पर इतना तय है कि राम नाम की आस्था, सेवा का संकल्प और मानवता के प्रति समर्पण के साथ यह साधना-यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है।
