
● मुंबई ।
इन दिनों आपको अपने आसपास की गलियों में या कुछ घरों के सामने अजीबो-गरीब नजारे हैरत में डाल रहे होंगे। कई घरों के बाहर लाल, बैंगनी और नीले रंग के पानी से भरी प्लास्टिक बोतलें लटकी या रखी दिखाई दे रही हैं। अगर आपने भी ऐसा कुछ देखा है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं, यह कोई सजावट नहीं और न ही कोई टोटका। दरअसल यह सोशल मीडिया से निकला एक नया चलन मात्र है।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल रील्स देखकर लोगों ने मान लिया है कि रंगीन पानी से भरी बोतलें घर के सामने टांगने से कुत्ते और अन्य आवारा जानवर वहां मल-मूत्र नहीं करते। कोई इसे देसी नुस्खा बता रहा है तो कोई इसे टोटका कहकर खारिज कर रहा है।
लोगों का दावा है कि इस उपाय से उन्हें रोज-रोज गंदगी साफ करने से राहत मिली है। मिर्जापुर कल्याणपुर निवासी सुनील कुमार बताते हैं कि पड़ोसियों की सलाह पर उन्होंने लाल और बैंगनी रंग मिलाकर बोतल घर के बाहर टांग दी। उनके अनुसार इसके बाद से कुत्तों और बिल्लियों की आवाजाही कम महसूस हो रही है।
कल्याणपुर के अंबेडकरपुरम सेक्टर-6 निवासी विनोद कुमार कहते हैं कि पड़ोस में बोतलें लटकी देखकर उन्होंने भी यह उपाय अपनाया है। हालांकि अभी उन्हें कोई खास फर्क नजर नहीं आया लेकिन लोगों का कहना है कि इससे आवारा जानवर गंदगी नहीं करते।
वहीं विशेषज्ञ इस दावे को वैज्ञानिक आधार से परे बताते हैं। पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि रंगीन पानी की बोतलें रखने या टांगने से पशुओं के न आने का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक कारण नहीं है। लोग सुनी-सुनाई बातों के आधार पर यह तरीका अपना रहे हैं। हालांकि, यदि इससे किसी को मानसिक संतोष मिल रहा है और कोई नुकसान नहीं हो रहा तो इसमें हानि भी नहीं है जबकि मनोविज्ञानी कह रहे हैं कि यह पूरा मामला मानव मनोविज्ञान से जुड़ा है। अवचेतन मन विश्वास के आधार पर व्यवहार को प्रभावित करता है। जब व्यक्ति मान लेता है कि किसी उपाय से समस्या दूर होगी तो उसे वैसा ही महसूस होने लगता है। रंगीन बोतलों का चलन भी इसी मानसिकता का परिणाम है, जिसका वैज्ञानिक आधार फिलहाल नहीं है।
कुल मिलाकर गलियों में लटकी ये रंगीन बोतलें अब चर्चा का विषय बन चुकी हैं, किसी के लिए राहत का तरीका तो किसी के लिए महज एक भ्रम।
