■ मनपा आयुक्त समेत शीर्ष अधिकारियों को व्यक्तिगत पेशी का आदेश

● मुंबई
मुंबई की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर मुंबई हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। शहर की हवा लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बावजूद प्रभावी कदम न उठाए जाने पर अदालत ने नगर प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र की जवाबदेही तय करने के संकेत दिए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने मनपा आयुक्त भूषण गगरानी और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) के सचिव सहित संबंधित शीर्ष अधिकारियों को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस गंभीर मामले की सुनवाई मंगलवार को ‘फर्स्ट ऑन बोर्ड’ की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की औपचारिकता या टालमटोल की गुंजाइश न रहे।
मुख्य न्यायाधीश श्रीचंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस समाधान अपेक्षित हैं। खंडपीठ ने दो टूक शब्दों में कहा, “हमें इसका समाधान निकालना होगा, इस तरह की स्थिति में जीना संभव नहीं है।”
गौरतलब है कि 31 अक्तूबर 2023 से उच्च न्यायालय मुंबई के वायु प्रदूषण की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। उसी दिन गिरते एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) को देखते हुए अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया था और इसे जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया था। सोमवार की सुनवाई में भी अदालत ने हालात की गंभीरता को दोहराते हुए संकेत दिया कि यदि त्वरित और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो प्रशासन को कड़े निर्देशों का सामना करना पड़ सकता है।
