■ राजगीर में नालंदा साहित्य उत्सव 2025 का सशक्त सत्र

नालंदा ।
राजगीर में आयोजित पाँच दिवसीय नालंदा साहित्य उत्सव 2025 (21 से 25 दिसंबर) के अंतर्गत नालंदा फिल्म फेस्टिवल के एक विचारोत्तेजक सत्र में सुप्रसिद्ध फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने भारतीय सिनेमा में भाषा और बोली की भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “मैं स्क्रिप्ट नहीं पढ़ता। सीन, सिचुएशन और किरदार को समझता हूँ और उसे जीता हूँ।” अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने अपने अभिनय जीवन की अनेक फिल्मों के उदाहरण भी प्रस्तुत किए।
इस सत्र का संचालन प्रख्यात लेखक पंकज दुबे ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में संजय मिश्रा के साथ इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (इम्पा) के अध्यक्ष अभय सिन्हा तथा भोजपुरी सिनेमा के इतिहासकार और गीतकार मनोज भावुक ने भी अपने विचार रखे।

अभय सिन्हा ने कहा कि उन्होंने विभिन्न विषयों पर लगभग डेढ़ सौ फिल्में बनाई हैं और सीमित बजट के बावजूद अनेक क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में गुणवत्ता के स्तर पर किसी भी भाषा की फिल्मों से कम नहीं हैं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में स्थापित भोजपुरी क्षेत्र के कलाकारों से अपनी मातृभाषा में अधिक काम करने की अपील की।
गीतकार मनोज भावुक ने कहा, “जब हम अपनी बोलियों के साथ पर्दे पर आते हैं तो संवाद नहीं, पूरा जीवन बोलता है। ‘वर्ड्स टू स्क्रीन’ की यह यात्रा तभी सार्थक होगी जब भारतीय सिनेमा भाषाई विविधता को अपनी शक्ति माने और हर शब्द, हर बोली को पूरी गरिमा के साथ स्क्रीन पर स्थान दे। यही सिनेमा को अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी और भारतीय बनाएगा।”
नालंदा फिल्म फेस्टिवल की आयोजक डी. आलिया और गंगा कुमार ने अतिथियों को स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर उनका स्वागत और अभिनंदन किया।
