
● मुंबई
गलत खान-पान की कीमत कितनी भारी पड़ सकती है, इसका चौंकाने वाला उदाहरण हाल ही में सामने आया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमरोहा की 11वीं कक्षा की एक छात्रा, जो लंबे समय से फास्ट फूड पर निर्भर थी, गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। इलाज के लिए उसे दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक छात्रा की आंतें आपस में चिपक चुकी थीं और पाचन तंत्र बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। सर्जरी के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है क्या चाउमीन, पिज्जा और बर्गर जैसे फास्ट फूड सचमुच जानलेवा हो सकते हैं?
इस विषय पर अमर उजाला में छपी मशहूर आहार विशेषज्ञ डॉ. आरती सिंह की खबर बताती है कि जंक फूड सीधे तौर पर मौत का कारण नहीं बनता पर शरीर को भीतर से इतना कमजोर कर देता है कि गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और अतिरिक्त शुगर की मात्रा अधिक होती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है और युवाओं में मोटापे की समस्या गहराती है। मोटापा आगे चलकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का रास्ता खोल देता है।
डॉ. आरती के अनुसार जंक फूड में कैलोरी तो भरपूर होती है, मगर फाइबर, विटामिन, मिनरल और प्रोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व न के बराबर होते हैं। लंबे समय तक ऐसा भोजन करने से शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता, जिससे थकान, कमजोरी और इम्युनिटी गिरने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं।
इतना ही नहीं, ज्यादा नमक और ट्रांस फैट के कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी बीमारियों का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का साफ संदेश है स्वाद की लत से पहले सेहत को प्राथमिकता देना ही समझदारी है।
