
● नई दिल्ली।
अरावली पर्वतमाला से जुड़े विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए अरावली रेंज में किसी भी नए खनन पट्टे पर पूर्ण विराम लगा दिया है। यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप अरावली के संरक्षण और खनन को लेकर एक स्पष्ट व स्वीकृत नीति के तहत नए क्षेत्रों की पहचान नहीं हो जाती।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के मुख्य सचिवों को भेजे पत्र में साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना अरावली क्षेत्र में नए खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। मंत्रालय का यह निर्देश ऐसे समय में आया है, जब अरावली पर्वत की नई परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार पर बड़े पैमाने पर खनन को रास्ता देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मंत्रालय ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि वर्तमान में संचालित खदानों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि खनन गतिविधियां पूरी तरह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही संचालित हों। किसी भी तरह की ढिलाई या नियमों की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अरावली रेंज में भविष्य में तभी नए खनन की अनुमति दी जाएगी, जब क्षेत्र के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एक वैज्ञानिक और समग्र मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा।
इस क्रम में मंत्रालय के सहायक आयुक्त जितेश कुमार ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आईसीएफआरई) के महानिदेशक को भी पत्र भेजा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अरावली रेंज के लिए ‘मैनेजमेंट प्लान फॉर सस्टेनेबल माइनिंग’ (एमपीएसएम) शीघ्र तैयार करने को कहा गया है, ताकि प्रतिबंधित क्षेत्रों के साथ-साथ नियंत्रित खनन के लिए उपयुक्त अतिरिक्त क्षेत्रों की भी वैज्ञानिक पहचान की जा सके।
