खारघर @नवी मुंबई

नवी मुंबई के खारघर स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड में आयोजित शिवमहापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने शिवभक्ति के माध्यम से धर्म, संस्कार, स्वास्थ्य एवं सामाजिक चेतना से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर भक्तों को प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया।
महाराजश्री ने कहा कि जिस घर में महिला का अपमान होता है, वहां लक्ष्मी का वास नहीं होता और देवी-देवताओं की कृपा भी उस घर पर नहीं बरसती। महिलाएं केवल परिवार का हिस्सा नहीं होतीं बल्कि वे घर की आत्मा, संस्कृति और संस्कारों की वाहक होती हैं। लक्ष्मी, जो घर में समृद्धि, सुख-शांति और सौभाग्य लाती हैं, ऐसे घर में निवास नहीं करतीं। साथ ही, देवी-देवताओं की कृपा भी उस घर पर नहीं बरसती, जिससे परिवार में अशांति, संघर्ष और कठिनाइयां बढ़ती हैं।
● सनातनी बच्चों को शास्त्रों का ज्ञान होना आवश्यक
भी सनातनी अपने बच्चों को शास्त्रों का ज्ञान अवश्य दें। यह केवल धार्मिक शिक्षा नहीं है, बल्कि यह बच्चों के चरित्र, संस्कार और जीवन मूल्यों को सुदृढ़ करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। शास्त्रों का ज्ञान बच्चों में धर्म, सत्य, नैतिकता और सद्गुणों का विकास करता है और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है।
● सनातन बोर्ड की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण
सनातन धर्म से जुड़े स्थलों की रक्षा और उन्हें मजबूत करने के लिए सनातन बोर्ड की स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बोर्ड संपूर्ण सनातन समुदाय की सेवा करेगा और हमारी आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण को सुनिश्चित करेगा।” हमारे मंदिरों के धन का प्रयोग केवल धर्म, संस्कार, शिक्षा और गुरु-कर्म के पावन कार्यों में हो।

● मैकाले की शिक्षा: भारतीय संस्कारों पर गहरा प्रहार
मैकाले की शिक्षा ने हमारे पारंपरिक शिक्षा पद्धति और संस्कारों को बर्बाद कर दिया है। यह शिक्षा प्रणाली केवल भौतिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान तक सीमित रह गई, जबकि बच्चों में संस्कार, धर्म और जीवन मूल्यों का विकास करने वाली शिक्षा को नजरअंदाज किया गया।
●सोशल मीडिया ने बच्चों के संस्कार छीने
हमारे बच्चे आधुनिकता के नाम पर अपनी मर्यादा और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। कम उम्र में ही बच्चे रील (Reels) बनाने, गंदे-अशोभनीय वीडियो तैयार करने और दिखावे की दुनिया में खो जाने को ही प्रगति समझने लगे हैं। स्कूल, जो शिक्षा और संस्कार का मंदिर होना चाहिए, वहाँ भी पढ़ाई के स्थान पर हमारे बच्चें डांस करते है , जो अत्यंत चिंताजनक है।
● अन्न का सम्मान ही जीवन का सम्मान
कभी भी अन्न की निंदा नहीं करनी चाहिए। अन्न केवल भोजन का स्रोत नहीं है, बल्कि यह ईश्वर की कृपा और जीवन का आधार है। उसका अपमान करना या उसकी अवहेलना करना उचित नहीं है। जो मनुष्य आदर और श्रद्धा के साथ खाता है, उसे न केवल शारीरिक बल मिलता है, बल्कि बुद्धि और समझदारी भी विकसित होती है। भोजन को सम्मान देना, उसकी शक्ति और महत्व को समझना, मानव जीवन के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
● फ्रिज में रखा हुआ भोजन करने से बचें
कभी भी फ्रिज में रखा हुआ भोजन या बचे हुए भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसे भोजन में उसकी प्राकृतिक ऊर्जा और शुद्धता समाप्त हो जाती है। भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा की शक्ति का स्रोत है। जब हम शुद्ध और ताजगीपूर्ण भोजन ग्रहण करते हैं, तब न केवल हमारा शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मन और बुद्धि भी स्पष्ट और तेज़ होती है।
