● नई दिल्ली

पृथ्वी पर जीवन की कहानी किसी बड़े जीव से नहीं बल्कि अत्यंत सूक्ष्म शुरुआत से आरंभ हुई। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि पृथ्वी पर सबसे पहले जो सजीव अस्तित्व में आए, वे सूक्ष्मजीव और जीवाणु थे। लंबे विकासक्रम के बाद, लगभग 60 से 80 करोड़ वर्ष पहले, ऐसे जीव प्रकट हुए जिन्हें हम आज ‘पशु’ कह सकते हैं यानी बहुकोशिकीय जीव।
इस विकास यात्रा में स्पंज का विशेष महत्व है। अधिकांश वैज्ञानिक मानते हैं कि स्पंज पृथ्वी का पहला पशु था। समुद्र की तलहटी में स्थिर रहने वाला यह जीव देखने में पौधे जैसा लगता है, लेकिन इसकी कोशिकीय संरचना पूरी तरह पशुओं जैसी होती है। यही कारण है कि इसे पशु जगत की शुरुआती कड़ी माना जाता है।

जीवाश्म विज्ञान ने इस समझ को और मजबूत किया है। वर्ष 2018 में रूस में मिले 55 करोड़ वर्ष पुराने ‘डिकिन्सोनिया’ नामक जीवाश्म ने वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया। इस जीव में कोलेस्ट्रॉल के अणु पाए गए-एक ऐसा जैव-रासायनिक तत्व जो केवल पशुओं में मिलता है। इसी आधार पर डिकिन्सोनिया को आज तक का सबसे प्राचीन पहचाना गया पशु माना गया।
पशुओं के विकास में बहुकोशिकीयता निर्णायक मोड़ साबित हुई। एक कोशिका से अनेक कोशिकाओं में परिवर्तन ने जीवों को नई क्षमताएँ दीं, जैसे गति करना, भोजन को पचाना और वातावरण के अनुरूप प्रतिक्रिया देना। इस परिवर्तन ने जीवन को अधिक संगठित और जटिल बनाया।

सबसे रोचक तथ्य यह है कि पहले पशुओं का जन्म भूमि पर नहीं, बल्कि महासागरों के गहरे जल में हुआ। उस समय पृथ्वी के वातावरण में ऑक्सीजन बेहद कम थी, फिर भी इन प्रारंभिक जीवों ने अद्भुत अनुकूलन क्षमता दिखाते हुए स्वयं को परिस्थितियों के अनुरूप ढाल लिया। यही अनुकूलन आगे चलकर जीवन के विस्तार और विविधता का आधार बना।
इस तरह, समुद्र न केवल जीवन की जन्मस्थली बने, बल्कि उन्होंने पृथ्वी पर पशु जीवन के विकास की दिशा भी तय की एक ऐसी यात्रा, जिसने अंततः जटिल जीवों और मानव के अस्तित्व का मार्ग प्रशस्त किया।
