■ मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में रौनक

● मुंबई
मुंबई में माघी गणेशोत्सव को लेकर तैयारियाँ अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं। चिंचपोकली, लालबाग और मागाठाणे जैसे इलाकों सहित कई क्षेत्रों में स्थित मूर्तिकारों की कार्यशालाएँ इन दिनों सृजनात्मक ऊर्जा से भरी नजर आ रही हैं। हर तरफ मिट्टी, रंग और आस्था का संगम दिखाई दे रहा है, जहाँ मूर्तिकार गणपति बाप्पा की मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
युवा मूर्तिकार वरुण घाणेकर बताते हैं कि मिट्टी की तैयारी से लेकर सांचे में ढलाई, नक्काशी, रंग-रोगन और सजावट तक का काम तेज़ी से किया जा रहा है। माघी गणेशोत्सव के लिए खासतौर पर छोटी और पारंपरिक शैली की मूर्तियों की मांग अधिक रहती है, इसलिए बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाने वाला माघी गणेशोत्सव भगवान गणेश का जन्मोत्सव माना जाता है। इस अवसर पर भक्त सुबह से ही व्रत, पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए मंदिरों की ओर रुख करते हैं।
शहरभर में माघी गणेशोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। घरों और सार्वजनिक मंडलों में बप्पा के स्वागत की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं। बाजारों में पूजन सामग्री, फूल और सजावटी सामान की खरीदारी बढ़ गई है। भक्त बेसब्री से उस शुभ दिन का इंतज़ार कर रहे हैं, जब गणपति बप्पा एक बार फिर श्रद्धा और उल्लास के साथ मुंबई में विराजमान होंगे।
