■ ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा–वर्सोवा सी ब्रिज’ से मुंबई को मिलेगी ट्रैफिक राहत

● मुंबई
मुंबईकरों के लिए एक बड़ी और सुकून देने वाली खबर है। मुंबई कोस्टल रोड परियोजना का दूसरा चरण तेज़ी से आकार ले रहा है। इसी चरण में बहुप्रतीक्षित बांद्रा–वर्सोवा सी लिंक का निर्माण शामिल है, जो शहर के पश्चिमी उपनगरों की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाला है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया है कि परियोजना का लगभग 26 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे मार्च 2028 तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य तय किया गया है। इस सी लिंक को आधिकारिक रूप से ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर बांद्रा–वर्सोवा सी ब्रिज’ नाम दिया जाएगा।
वर्सोवा–बांद्रा सी लिंक का निर्माण कार्य मुंबई की समुद्री सीमा में काफी आगे तक पहुँच चुका है। बांद्रा और जुहू के बीच अरब सागर में करीब 900 मीटर तक पुल का निर्माण पूरा किया जा चुका है। यह परियोजना मुंबई कोस्टल रोड के दूसरे चरण की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है।
परियोजना के तहत चार इंटरचेंज या कनेक्टर ब्रिज भी बनाए जा रहे हैं, जो बांद्रा, कार्टर रोड, जुहू कोलीवाड़ा और वर्सोवा को जोड़ेंगे। इन सभी स्थानों पर पिलर निर्माण का काम शुरू हो चुका है।
करीब 25 किलोमीटर लंबा यह वर्सोवा–बांद्रा सी लिंक, दक्षिण में नरीमन पॉइंट–वर्ली कोस्टल रोड, बीच में बांद्रा–वर्ली सी लिंक और उत्तर में प्रस्तावित वर्सोवा–कांदिवली–भाईंदर कोस्टल रोड को आपस में जोड़ेगा। इससे मुंबई का तटीय यातायात नेटवर्क और अधिक सुगम होगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल द्वारा बनाए जा रहे इस पुल की अनुमानित आयु लगभग 100 वर्ष बताई जा रही है। वहीं, परियोजना के तहत करीब 1500 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित होने से पर्यावरण को लेकर चिंताएँ भी जताई जा रही हैं।
पूरे कोस्टल रोड की कुल लंबाई लगभग 60 किलोमीटर होगी। वर्तमान में वर्सोवा से भाईंदर तक का सफर 90 से 120 मिनट में पूरा होता है, जबकि इस सी लिंक के शुरू होने के बाद यही दूरी मात्र 15 से 20 मिनट में तय की जा सकेगी।
कुल मिलाकर, बांद्रा–वर्सोवा सी लिंक मुंबई को जाम से राहत दिलाने और शहर की रफ्तार बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होने जा रहा है।
