
● मुंबई
गोरेगांव पश्चिम स्थित बांगुर नगर के लक्ष्मी सरस्वती ग्राउंड पर चंद्रकांत गुप्ता एवं चमेली देवी गुप्ता के पावन संकल्प से, प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के कृपापात्र पूज्य राजन महाराज के व्यासत्व में रामकथा सेवा समिति, मुंबई द्वारा आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव में पूज्य राजन महाराज ने मिथिला के मंगल विवाह प्रसंग का भावपूर्ण गान किया।
कथा के दौरान राजन महाराज ने कहा कि हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि देवता केवल आकाश में ही रहते हैं। इस धरती पर भी देवता होते हैं और सफेद कुर्ते में भी राक्षस हो सकते हैं। भगवान शिव के अनुसार, जो व्यक्ति माता-पिता, गुरु और भगवान को नहीं मानता तथा साधु-संतों से सेवा करवाता है, वही राक्षस है। वहीं, जो दूसरों के उत्कर्ष को देखकर प्रसन्न होता है, वही देवत्व भाव है। ऐसे लोग ही इस धरती के देवता हैं।
पूज्य राजन महाराज ने बताया कि मानस में भगवान केवल दो स्थानों पर हँसते हैं, एक श्रृंगवेरपुर में गंगा तट पर केवट जी के समक्ष और दूसरे मिथिला में सीताजी के समक्ष, क्योंकि दोनों का प्रेम अलौकिक था। अलौकिक प्रेम में चाहत नहीं, केवल समर्पण होता है। प्रेम में चाहत और नियम आ जाने पर प्रेम समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की पूजा लोग समय देखकर करते हैं, किंतु प्रेम में समय कभी बाधक नहीं होता। प्रेम कभी भी किया जा सकता है। भगवान आरती करने से नहीं, प्रेम करने से प्रसन्न होते हैं।
कथा में धनुष भंग का समाचार मिलते ही आवेश में परशुराम जी का जनक जी के दरबार में आगमन होता है। इस प्रसंग में पूज्य राजन महाराज ने कहा कि क्रोध की अवस्था में व्यक्ति को कोई बात समझ में नहीं आती। उन्होंने पूज्य प्रेममूर्ति श्री प्रेमभूषण महाराज का कथन उद्धृत करते हुए कहा, “जो आपको क्रोध दिला सकता है, वह आपको कभी भी परास्त कर सकता है।”

परशुराम-लक्ष्मण संवाद के दौरान भगवान श्रीराम के वचन “ब्राह्मणों के प्रति निष्ठा रखने वाला सर्वकाल निर्भय होकर जीता है” को सुनते ही परशुराम जी का क्रोध शांत हो जाता है। राम को भगवान स्वरूप जानकर परशुराम जी तपस्या हेतु प्रस्थान करते हैं।
राजन महाराज ने यह भी कहा कि किसी दूसरे के घर जाकर कुल परंपरा के विषय में राय नहीं देनी चाहिए। कुल परंपरा के अनुसार विवाह हेतु मिथिला के दूत अयोध्या में दशरथ जी के पास जाते हैं और अयोध्या से बारात लेकर चक्रवर्ती महाराज जनकपुर आते हैं। मिथिला में चक्रवर्ती जनक जी के चारों पुत्रों का विवाह सनातन कुल परंपरा के अनुसार संपन्न होता है।
मिथिला के विवाह मंगल प्रसंग पर पूज्य राजन महाराज ने “चुमावत हो ललना धीरे-धीरे”, “आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया”, “छैलवा को देइहौ चुनि-चुनि गारी” जैसे पारंपरिक मंगल गीतों का गायन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
रामकथा महोत्सव में उमड़े अपार जनसैलाब के बीच पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी, लोकप्रिय गायक मोहन, गणेश अग्रवाल, रमेश चौबे, प्रीति पांडे, अशोका तिवारी, सरिता चौबे, सुधा दूबे, रेखा गुप्ता, दिनेश तिवारी सहित अनेक गणमान्यजनों ने रामकथा का श्रवण लाभ प्राप्त किया।
