
● अहमदाबाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं और इस प्रवास का केंद्रबिंदु बना है ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि इतिहास, आस्था और राष्ट्रबोध को एक सूत्र में पिरोने वाला महोत्सव है। इसका उद्देश्य सोमनाथ की गौरवगाथा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना और उन वीरों को स्मरण करना है जिन्होंने धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा में अपने प्राण अर्पित किए।
प्रधानमंत्री का यह दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक—दोनों दृष्टियों से अर्थपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात से उठने वाला यह संदेश देश के दक्षिणी छोर, तमिलनाडु तक संवाद की एक सेतु रचना करता है, जिससे पश्चिम और दक्षिण भारत के बीच भावनात्मक जुड़ाव और अधिक सुदृढ़ होता है।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्ष, ध्वंस और पुनर्निर्माण की मिसाल है। वर्ष 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण से मंदिर को क्षति पहुंची, पर हिंदुओं की आस्था अडिग रही। समय के थपेड़ों के बावजूद विश्वास की वही लौ आज भी मंदिर शिखर पर धर्मध्वजा बनकर गर्व से लहरा रही है।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को नए सिरे से रेखांकित किया। शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्होंने यह संदेश दिया कि
