■ मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने कहा, पूरा सहयोग करेंगे

● मुंबई।
लगभग डेढ़ दशक के अंतराल के बाद राज्य ग्रंथालय परिषद के पुनर्गठन ने महाराष्ट्र के ग्रंथालय आंदोलन में नई ऊर्जा का संचार किया है। नवगठित परिषद की पहली बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई, जिसमें उच्च एवं तंत्र शिक्षा मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने स्पष्ट किया कि शासन ग्रंथालय आंदोलन को सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
दूरदर्शन प्रणाली के माध्यम से बैठक में शामिल हुए मंत्री पाटील ने बताया कि परिषद की पिछली बैठक 26 मई 2009 को हुई थी। करीब 16 वर्षों बाद आयोजित यह बैठक ग्रंथालयों के पुनरोत्थान और वाचन संस्कृति के विस्तार की दिशा में अहम मील का पत्थर मानी जा रही है। बैठक में विभागीय अपर मुख्य सचिव, उपसचिव, ग्रंथालय निदेशक, महाराष्ट्र राज्य ग्रंथालय संघ के प्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान ग्रंथालय संचालनालय की वर्ष 2008-09 से 2024-25 तक की वार्षिक रिपोर्टों को मंजूरी दी गई। मंत्री पाटील ने भरोसा दिलाया कि ग्रंथालय आंदोलन के लिए आवश्यक आर्थिक और प्रशासनिक सहायता सुनिश्चित की जाएगी तथा ग्रंथालय प्रबंधन के सर्वांगीण विकास के लिए ठोस और दूरगामी निर्णय लिए जाएंगे।
ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में वाचन संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से मोबाइल वाचन वैन खरीदकर उन्हें गांवों, स्कूलों और पिछड़े इलाकों तक पहुंचाने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। ग्राम विकास विभाग के सहयोग से ग्रंथालय आधारित उपक्रमों के विस्तार पर सहमति बनी।
इसके साथ ही राज्य केंद्रीय ग्रंथालय और छह क्षेत्रीय ग्रंथालयों के माध्यम से घूम-घूमकर सेवा देने की योजना को प्रायोगिक स्तर पर लागू करने, सार्वजनिक ग्रंथालयों के नियमित निरीक्षण, ई-लाइब्रेरी, यूनिक डेटाबेस और घूमते वाचनालय जैसे नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मंत्री पाटील ने दोहराया कि राज्य सरकार ग्रंथालय आंदोलन को नई मजबूती देने और महाराष्ट्र में वाचन संस्कृति को आधुनिक दौर के अनुरूप दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
