
● मुंबई
नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 15 जनवरी को होने वाले मुंबई महानगरपालिका चुनावों ने इस बार राजनीति का रुख बदल दिया है। शहर की जहरीली हवा और पर्यावरणीय संतुलन जैसे मुद्दे, जो अब तक हाशिये पर रहते थे, पहली बार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के साझा एजेंडे में शामिल हो गए हैं।
भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाली महा विकास आघाड़ी तथा मनसे, शिवसेना (उबाठा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) से बने तीसरे मोर्चे, तीनों ही गठबंधन वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और मुंबई की वायु गुणवत्ता सुधारने का दावा कर रहे हैं। यह पहला अवसर है जब बीएमसी चुनाव लड़ रहे सभी बड़े राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक सुर में बोलते दिखाई दे रहे हैं।
घोषणापत्रों में वायु प्रदूषण के साथ-साथ शहर की जर्जर सड़कों, जलभराव और असमान जलापूर्ति जैसे पुराने नागरिक मुद्दों को भी स्थान मिला है। महायुति गठबंधन के 16 पृष्ठों के घोषणापत्र में पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें वायु गुणवत्ता सूचकांक को नियंत्रण में रखने के लिए व्यापक कार्ययोजना और पर्यावरणीय सततता हेतु 17,000 करोड़ रुपये के प्रावधान का उल्लेख है। साथ ही, शहर में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों की संख्या दोगुनी करने और प्रमुख चौराहों पर रियल-टाइम एक्यूआई डिस्प्ले लगाने का वादा किया गया है।
वहीं, मनसे-शिवसेना (उबाठा)-राकांपा (एसपी) के संयुक्त घोषणापत्र में सत्ता में आने पर उत्सर्जन स्तरों में उल्लेखनीय कमी लाने का संकल्प जताया गया है।
चुनावी वादों की यह नई हवा मुंबईवासियों के लिए उम्मीद तो जगाती है, लेकिन असली परीक्षा मतदान के बाद होगी, जब यह देखा जाएगा कि क्या घोषणापत्रों की बातें सचमुच शहर की हवा को साफ कर पाएंगी।
