
● मुंबई
गोरेगांव पश्चिम स्थित बांगुर नगर के लक्ष्मी सरस्वती ग्राउंड पर चंद्रकांत गुप्ता एवं चमेली देवी गुप्ता के पावन संकल्प से प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के कृपापात्र पूज्य राजन महाराज के व्यासत्व में रामकथा सेवा समिति, मुंबई द्वारा आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव में रामकथा सुंदरकांड में प्रवेश कर गई।
प्रभु श्रीराम की कृपा से हनुमानजी महाराज लंका में माता सीता का पता लगाने जाते हैं। विभीषण से मित्रता और सीताजी के अन्वेषण कार्य को पूर्ण करने के पश्चात अशोक वाटिका का उजाड़, अक्षय कुमार का वध तथा लंका दहन कर हनुमानजी प्रभु के चरणों में लौटते हैं।
राजन महाराज ने कथा के भाव पक्ष को आलोकित करते हुए कहा कि भगवत कृपा की प्राप्ति के लिए प्रभु से निरंतर प्रार्थना करनी चाहिए कि भगवान हमें कभी न छोड़ें। उन्होंने कहा कि काम करने वाला कर्म करता है और कुछ न करने वाला केवल फोटो खिंचवाता है। धरती के हर कोने में भगवान के भक्त अवश्य मिलेंगे, पर शर्त यह है कि पहले स्वयं भक्त बनना होगा। भक्ति एक ऐसा चुंबक है, जिसमें भक्त स्वतः आकर्षित होकर जुड़ जाता है। बचपन में ऋषि के शाप से शापित नल-नील जब सेतु बंधन जैसे रामकार्य में लगे, तो वह शाप भी वरदान बन गया।

लंकाकांड का वर्णन करते हुए पूज्य राजन महाराज ने कहा कि रावण ने अपने परिवार सहित किसी की बात न मानकर युद्ध को अवश्यंभावी बना दिया। प्रभु श्रीराम सेना सहित लंका पर धावा बोलते हैं और रावण का वध कर उसे गति प्रदान करते हैं। भगवान की आज्ञा से इंद्र युद्ध में मारे गए वानरों पर अमृतवर्षा कर उन्हें पुनर्जीवित करते हैं। लंका विजय के पश्चात विभीषण को राजसत्ता सौंपकर प्रभु श्रीराम सीतामैया और लक्ष्मण जी सहित पुष्पक विमान से अयोध्या लौटते हैं।
प्रभु के अयोध्या आगमन की पूर्व सूचना हनुमानजी पहले ही अयोध्या पहुंचकर दे चुके थे। भगवान श्रीराम के आगमन पर सजी-धजी अयोध्या में गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से रामराज्याभिषेक संपन्न हुआ।
कथा प्रसंगों के बीच ‘मोरी छोड़ो न बहियां सियाजी के सैंया’, ‘भगवन हंसे ल हंसावेला कवन गुनवा से’, ‘राजा बने रघुरैया, अवध आज बाजे बधइयां’ जैसे भजनों से श्रोतागण भावविभोर हो उठे।
श्रोताओं की अपार भीड़ के बीच सद्गुरु फाउंडेशन के चेयरमैन गणेश अग्रवाल, रामजानकी ट्रस्ट के प्रमुख दिनेश तिवारी, निशा शर्मा, अशोका तिवारी, रेखा गुप्ता, सरिता चौबे, विनय चौबे सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।
