■ मुंबई महानगर प्रदेश में 40 स्थानों पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

● मुंबई
भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना से सराबोर ‘भक्ति पर्व समागम’ का आयोजन 11 जनवरी को हरियाणा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल, समालखा में भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस अवसर पर निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति केवल शब्द नहीं, जीवन जीने की सजग यात्रा है। उनके प्रेरणादायी संदेशों ने उपस्थित भक्तों को आत्ममंथन और जागरूक जीवन की ओर प्रेरित किया।

मुख्य समागम के समानांतर मुंबई महानगर प्रदेश में भी इस पावन पर्व को व्यापक रूप से मनाया गया। नेवी नगर से वसई-विरार, दादर से बदलापुर, कसारा, भिवंडी, नवी मुंबई, पनवेल और उरण सहित लगभग 40 स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भक्तों ने मिशन के पुरातन संतों के त्यागमय जीवन से प्रेरणा ग्रहण की और भक्ति, सेवा व समर्पण के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

समालखा में आयोजित मुख्य समागम में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सान्निध्य में आध्यात्मिक उल्लास की अनुपम छटा देखने को मिली। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने सत्संग के माध्यम से आत्मिक शांति और आनंद का अनुभव किया। इस अवसर पर परम संत संतोख सिंह जी सहित अन्य संत महापुरुषों के तप, त्याग और ब्रह्मज्ञान के प्रचार-प्रसार में दिए गए योगदान का भावपूर्ण स्मरण किया गया।
समागम के दौरान वक्ताओं, कवियों और गीतकारों ने गुरु महिमा, मानव कल्याण और भक्ति भाव को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से व्यक्त किया। निरंकारी मिशन के मूल सिद्धांत ब्रह्मज्ञान के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाना को रेखांकित करते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सच्ची भक्ति दिखावे से नहीं, बल्कि सरल, निष्कपट और सेवा भाव से परिपूर्ण जीवन से प्रकट होती है। भक्ति पर्व समागम ने श्रद्धालुओं को इसी जीवन-दृष्टि को अपनाने की प्रेरणा दी।
