
● मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सत्ता किसके हाथ जाएगी, इसका फैसला आज, 15 जनवरी को ईवीएम में बंद हो जाएगा। महाराष्ट्र में एक साथ 29 महानगरपालिकाओं के लिए मतदान हो रहा है, लेकिन आर्थिक दृष्टि से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का महत्व सबसे अलग और निर्णायक माना जा रहा है।
मुंबई मनपा न केवल भारत, बल्कि एशिया की सबसे समृद्ध महानगरपालिकाओं में शामिल है। वर्ष 2025–26 के लिए बीएमसी का अनुमानित बजट 74 हजार 427 करोड़ रुपये है। यह राशि देश के कई छोटे राज्यों के सालाना बजट से भी अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि भारत के 28 राज्यों में से कम से कम आठ राज्यों का वार्षिक बजट मुंबई मनपा से कम है।
पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों के साथ गोवा जैसे छोटे राज्यों का बजट सामान्यतः 20 हजार से 60 हजार करोड़ रुपये के बीच रहता है। सिक्किम का बजट लगभग 10 से 15 हजार करोड़ रुपये, मिजोरम का 15 से 20 हजार करोड़ रुपये, नागालैंड का 20 से 25 हजार करोड़ रुपये और मणिपुर का 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के दायरे में है। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और गोवा का बजट भी औसतन 25 से 40 हजार करोड़ रुपये के आसपास सिमटा हुआ है। ये सभी आंकड़े 2025–26 के अनुमानित बजट पर आधारित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन राज्यों की आमदनी का बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान पर निर्भर रहता है, क्योंकि उनकी स्वयं की आय सीमित होती है। इसी कारण उनका कुल बजट मुंबई महानगरपालिका की तुलना में कम नजर आता है।
राज्यों के स्तर पर तुलना करें, तो महाराष्ट्र का कुल बजट 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, कर्नाटक का बजट 4 लाख करोड़ रुपये से ऊपर और उत्तर प्रदेश का वार्षिक बजट साढ़े सात लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। वहीं मुंबई महानगरपालिका की आय संपत्ति कर, स्थानीय करों और विभिन्न शुल्कों से होती है।
यही कारण है कि मुंबई मनपा पर नियंत्रण को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। 15 जनवरी का मतदान केवल सत्ता का फैसला नहीं करेगा, बल्कि अरबों रुपये के बजट और मुंबई के विकास की दिशा भी तय करेगा।
