
● लखनऊ
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई ने स्वास्थ्य जांच के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने पुणे की एरा टेक्नोलॉजीज़ के सहयोग से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित ऐसी डिवाइस विकसित की है, जो मात्र 20 सेकंड में चेहरे को स्कैन कर मरीज की पूरी हेल्थ रिपोर्ट उपलब्ध करा देती है। यह तकनीक जांच प्रक्रिया को तेज, सरल और अधिक सटीक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हाल ही में आयोजित एआई हेल्थ समिट की प्रदर्शनी में इस डिवाइस ने खास आकर्षण पैदा किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब मेडिसिन विभाग की इस तकनीक को देखा, तो उन्होंने इसकी उपयोगिता को सराहा। शासन स्तर पर इसे उत्तर प्रदेश की सभी सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों (पीएचसी) से जोड़ने के लिए कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस डिवाइस के सामने खड़े होते ही मरीज की बीपी, पल्स, हार्ट और ब्रीदिंग रेट, कार्डियोवैस्कुलर लोड, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सहित कुल आठ स्वास्थ्य मानकों की जानकारी तत्काल मिल जाती है। विश्वविद्यालय ने एआई आधारित बीपी क्लीनिक भी शुरू किया है, जहां अब तक दो हजार से अधिक मरीजों की जांच 92 से 95 प्रतिशत सटीकता के साथ की जा चुकी है।
मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं एआई विंग प्रभारी डॉ. सुशील यादव के अनुसार बीते छह महीनों से ओपीडी में इस डिवाइस का नियमित उपयोग हो रहा है। इन्फ्रारेड और थर्मल रेडिएशन तकनीक के जरिए चेहरे की रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह का विश्लेषण कर सेहत की विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिसमें तनाव स्तर भी शामिल है।
कुलपति डॉ. अजय सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय ने फैटी लिवर और हेपेटाइटिस की शुरुआती पहचान के लिए भी एआई आधारित डिवाइस विकसित की है। स्वास्थ्य सेवाओं में यह तकनीकी पहल भविष्य में प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।
