- साधना, सिद्धि और शुभ कार्यों के लिए दुर्लभ अवसर

● मुंबई
माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ इस वर्ष 19 जनवरी से हो रहा है और इसका समापन 27 जनवरी को होगा। नवरात्रि की शुरुआत सर्वार्थसिद्धि योग के विशेष संयोग में होगी, जबकि अंतिम दिन सर्वार्थसिद्धि योग के साथ रवि योग का भी निर्माण होगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संपूर्ण अवधि अत्यंत शुभ, फलप्रद और ऊर्जा से परिपूर्ण मानी जा रही है।
इन नौ दिनों को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है। शुक्र के अस्त रहने के कारण जिन कार्यों में अब तक विलंब हो रहा था, उन्हें गति देने का यह श्रेष्ठ समय है। मान्यता है कि इस काल में आरंभ किए गए कार्यों में सफलता, स्थायित्व और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
माघ गुप्त नवरात्रि शक्ति साधना का विशेष पर्व है। इस दौरान दस महाविद्याओं मां काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की गुप्त रूप से उपासना की जाती है। साधक मां दुर्गा की आराधना के साथ गुप्त साधना, मंत्र-जप और तंत्र सिद्धि में प्रवृत्त रहते हैं। गुप्त नवरात्रि को मंत्र, साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए विशेष महत्व प्राप्त है।
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक चलने वाली यह नवरात्रि वर्ष की चार नवरात्रियों में से एक है। वर्ष में दो गुप्त और दो प्रकट नवरात्रि होती हैं। माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त मानी जाती हैं, जबकि चैत्र और आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि प्रकट रूप में मनाई जाती हैं। देवी भागवत महापुराण में इन चारों नवरात्रियों का विस्तृत उल्लेख मिलता है।
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी 2026, सोमवार को प्रातः 01:21 बजे से प्रारंभ होकर 20 जनवरी 2026, मंगलवार को प्रातः 02:14 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को ही माना जाएगा।
