
● इंदौर
इंदौर की सड़कों पर वर्षों से दिखाई देने वाली भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी एक हैरान कर देने वाली सच्चाई सामने आई है। सराफा क्षेत्र में साधारण भिखारी के रूप में पहचाना जाने वाला मंगीलाल दरअसल भारी संपत्ति का स्वामी निकला। जांच में खुलासा हुआ है कि उसके पास शहर के अलग-अलग हिस्सों में तीन मकान, तीन ऑटो रिक्शा और एक आलीशान कार है, जिसे चलाने के लिए उसने निजी ड्राइवर तक रखा हुआ है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा चलाए जा रहे भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के दौरान मंगीलाल को रेस्क्यू किया गया। उसकी पृष्ठभूमि सामने आते ही अधिकारी भी चकित रह गए। सराफा की तंग गलियों में वह लकड़ी की छोटी गाड़ी, कंधे पर थैला और हाथ में पुराने जूते लिए खड़ा रहता था। वह किसी से सीधे भीख नहीं मांगता था, लेकिन उसकी स्थिति देखकर लोग स्वयं ही उसे पैसे दे देते थे।
जांच में सामने आया कि इसी तरीके से मंगीलाल रोज़ाना 500 से 1000 रुपये तक जुटा लेता था। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि भीख से इकट्ठा की गई रकम को वह सराफा क्षेत्र के कुछ व्यापारियों को ब्याज पर उधार देता था। यह कर्ज़ एक दिन और एक सप्ताह की अवधि के हिसाब से दिया जाता था और वह रोज इलाके में पहुंचकर ब्याज की वसूली करता था।
रेस्क्यू टीम के नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा के अनुसार मंगीलाल की संपत्ति केवल यहीं तक सीमित नहीं है। तीन मकानों के अलावा उसके पास तीन ऑटो रिक्शा हैं, जिन्हें वह किराये पर चलवाता है। आलीशान कार के संचालन के लिए उसने अलग से ड्राइवर नियुक्त कर रखा है।
बताया गया है कि मंगीलाल अलवास क्षेत्र में अपने माता-पिता के साथ रहता है, जबकि उसके दो भाई अलग-अलग स्थानों पर रहते हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा ने जानकारी दी कि फरवरी 2024 से इंदौर में ‘भिक्षावृत्ति मुक्त शहर’ अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत इस तरह के मामलों का खुलासा हो रहा है।
