◆ एफआईआर नीति से बदली तस्वीर, मुंबई में ड्रिंक-ड्राइव मामलों में 39 प्रतिशत की कमी

● मुंबई
मुंबई में सड़क सुरक्षा की दिशा में एक उत्साहजनक बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2025 के दौरान नशे में वाहन चलाने (ड्रिंक-एंड-ड्राइव) के मामलों में 39 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जहां पिछले वर्ष ऐसे 9,462 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 5,700 से कुछ अधिक रह गई।
ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस सकारात्मक बदलाव की प्रमुख वजह ड्रिंक-ड्राइव मामलों में एफआईआर दर्ज करने की सख्त नीति है, जिसे मध्य 2024 से प्रभावी किया गया। पहले जहां अधिकतर मामलों में स्थानीय स्तर पर चालान काटकर कार्रवाई पूरी कर दी जाती थी, वहीं अब मोटर वाहन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत सीधे एफआईआर दर्ज की जा रही है।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 में 2,400 से अधिक मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन या आगे की कार्रवाई के लिए आरटीओ को भेजे गए। इससे वाहन चालकों में कानून के प्रति गंभीरता बढ़ी और नियमों के पालन में स्पष्ट सुधार नजर आया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एफआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद कार्रवाई केवल लाइसेंस जब्ती तक सीमित नहीं रहती। आरोपी को अदालत में पेश होना पड़ता है और ब्रेथ एनालाइज़र रिपोर्ट सहित अन्य साक्ष्य भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं। इसका दंडात्मक ही नहीं, सामाजिक स्तर पर भी प्रभाव पड़ता है, जो लोगों को नियमों के उल्लंघन से रोकने में कारगर साबित हो रहा है।
जॉइंट कमिश्नर ट्रैफिक अनिल कंभारे के अनुसार इस सख्ती का असर खास तौर पर नए साल की पूर्व संध्या, 31 दिसंबर 2025 को देखने को मिला। उस दिन ड्रिंक-ड्राइव के केवल 211 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी तिथि पर यह संख्या 333 थी।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों ने ट्रैफिक पुलिस की इस रणनीति की सराहना करते हुए इसे प्रभावी कदम बताया है। साथ ही उन्होंने तेज़ रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाने और अन्य जोखिमपूर्ण ट्रैफिक उल्लंघनों पर भी इसी तरह की सख्ती की सिफारिश की है ताकि सड़क दुर्घटनाओं में और कमी लाई जा सके।
