■ सूर्यकांत उपाध्याय

एक व्यक्ति सुबह-सवेरे उठा, साफ कपड़े पहने और भगवान जी के दर्शन के लिए मंदिर की ओर चल दिया ताकि दर्शन कर आनंद प्राप्त कर सके। चलते-चलते मार्ग में वह ठोकर खाकर गिर पड़ा। उसके कपड़े कीचड़ से सन गए। वह वापस घर आया, कपड़े बदले और फिर मंदिर की ओर रवाना हुआ। किंतु ठीक उसी स्थान पर वह फिर ठोकर खाकर गिर पड़ा। दोबारा घर लौटकर उसने कपड़े बदले और पुनः मंदिर की ओर चल दिया।
जब वह तीसरी बार उस स्थान पर पहुँचा तो क्या देखता है कि एक व्यक्ति हाथ में चिराग लिए खड़ा है और उसे अपने पीछे-पीछे चलने को कह रहा है। इस प्रकार वह व्यक्ति उसे मंदिर के द्वार तक ले आया। पहले व्यक्ति ने उससे कहा, आप भी अंदर आकर दर्शन का लाभ लें। किंतु वह व्यक्ति चिराग हाथ में थामे वहीं खड़ा रहा और मंदिर में दाख़िल नहीं हुआ। दो-तीन बार आग्रह करने पर उसने पूछा, आप अंदर क्यों नहीं आ रहे हैं?
दूसरे व्यक्ति ने उत्तर दिया, “इसलिए क्योंकि मैं काल हूँ।”
यह सुनकर पहले व्यक्ति की हैरत का ठिकाना न रहा। काल ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, मैं ही था जिसने आपको भूमि पर गिराया था। जब आप घर जाकर कपड़े बदलकर पुनः मंदिर की ओर रवाना हुए, तब भगवान ने आपके सारे पाप क्षमा कर दिए। जब मैंने आपको दूसरी बार गिराया और आपने फिर घर जाकर कपड़े बदले तथा दोबारा जाने का निश्चय किया, तब भगवान ने आपके पूरे परिवार के पाप क्षमा कर दिए। मैं डर गया कि यदि इस बार भी मैंने आपको गिराया और आप फिर कपड़े बदलकर चल पड़े, तो कहीं ऐसा न हो कि भगवान आपके पूरे गाँव के लोगों के पाप क्षमा कर दें। इसलिए मैं स्वयं आपको यहाँ तक पहुँचाने आया हूँ।
अब जरा हम स्वयं को देखें, उस व्यक्ति ने दो बार गिरने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और तीसरी बार भी मंदिर पहुँच गया। और एक हम हैं, यदि हमारे घर कोई मेहमान आ जाए या कोई काम आ पड़े, तो हम सत्संग छोड़ देते हैं, भजन-जाप छोड़ देते हैं। क्यों?
क्योंकि हम जीव अपने भगवान से अधिक दुनिया की चीज़ों और रिश्तेदारों से प्रेम करते हैं, उनसे अधिक मोह रखते हैं। इसके विपरीत, वह व्यक्ति दो बार कीचड़ में गिरने के बाद भी तीसरी बार घर जाकर कपड़े बदलकर मंदिर चला गया। क्यों?
क्योंकि उसके हृदय में भगवान के लिए अपार प्रेम था। वह किसी भी स्थिति में अपनी भक्ति का नियम टूटने नहीं देना चाहता था। इसी कारण काल को स्वयं उस व्यक्ति को उसकी मंज़िल तक पहुँचाना पड़ा, उसी व्यक्ति को, जिसे उसने दो बार कीचड़ में गिराया था।
