
● नई दिल्ली
ताजा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़े देश की रोजगार तस्वीर में मामूली लेकिन सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करते हैं। अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 6.7 प्रतिशत पर आ गई है। पिछली तिमाही की तुलना में यह हल्की गिरावट मानी जा रही है, जिसमें शहरी क्षेत्रों और महिला वर्कफोर्स की भागीदारी में बढ़ोतरी अहम कारण रही।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी तीन माह के इस सर्वे के मुताबिक, शहरी इलाकों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर जुलाई–सितंबर 2025 की 6.9 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर–दिसंबर 2025 में 6.7 प्रतिशत दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि शहरों में रोजगार के अवसर धीरे-धीरे बेहतर हो रहे हैं।
ग्रामीण भारत में भी स्थिति में सुधार देखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसी आयु वर्ग की बेरोजगारी दर पिछली तिमाही के 4.4 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत पर आ गई। इस गिरावट के पीछे ग्रामीण पुरुषों और महिलाओं—दोनों में बेरोजगारी दर का कम होना प्रमुख वजह बताया गया है।
हालांकि, आंकड़े यह भी बताते हैं कि स्वरोजगार के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी मिश्रित रही। शहरी क्षेत्रों में पुरुषों के स्वरोजगार में गिरावट दर्ज की गई, जहां यह दर जुलाई–सितंबर 2025 के 6.2 प्रतिशत से घटकर अक्टूबर–दिसंबर तिमाही में 5.9 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कुल बेरोजगारी दर में कमी आई है।
स्वरोजगार के अनुपात पर नजर डालें तो ग्रामीण क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के स्वरोजगार लोगों की हिस्सेदारी बढ़कर 63.2 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 62.8 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात भी बढ़कर 39.7 प्रतिशत पर पहुंच गया, जबकि जुलाई–सितंबर 2025 में यह 39.3 प्रतिशत था।
कुल मिलाकर, पीएलएफएस के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि रोजगार के मोर्चे पर देश में धीमी मगर सकारात्मक दिशा में बढ़त देखी जा रही है।
