■ ‘ब्लू लिंक’ से ‘आंसर इंजन’ तक इंटरनेट की नई छलांग

● नई दिल्ली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते दायरे ने इंटरनेट की पारंपरिक संरचना को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में ‘दस नीले लिंक’ वाला सर्च मॉडल तेजी से पीछे छूटेगा और उसकी जगह एआई आधारित “आंसर इंजन” प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
अब तक किसी भी जानकारी के लिए सर्च इंजन पर प्रश्न टाइप करते ही सामने वेबसाइटों की सूची खुल जाती थी। उपयोगकर्ता अलग-अलग लिंक पर जाकर तथ्य जुटाते थे। लगभग दो दशकों से यही तरीका इंटरनेट की पहचान रहा है। किन्तु अब परिदृश्य बदल रहा है। नई व्यवस्था में उपयोगकर्ता प्रश्न पूछेगा और एआई उसी क्षण संक्षिप्त, सटीक और व्यवस्थित उत्तर प्रस्तुत कर देगा। कई बार पूरी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी, जिससे अलग वेबसाइटों पर जाने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
इंटरनेट का स्वरूप भी बदलता दिख रहा है। वह केवल सूचनाओं की लाइब्रेरी भर नहीं रहेगा, बल्कि संवाद का जीवंत मंच बन जाएगा। लोग एआई से सीधे बातचीत कर अपनी जरूरत के अनुसार जानकारी प्राप्त करेंगे।
इस बदलाव का असर वेबसाइटों पर भी पड़ेगा। उन्हें अधिक मौलिक, प्रमाणिक और ठोस सामग्री प्रस्तुत करनी होगी, ताकि एआई प्रणालियों की प्राथमिक सूची में स्थान बना सकें। स्पष्ट है कि आने वाला समय सूचना जगत में प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय खोलने वाला है, जहां गुणवत्ता ही असली पहचान बनेगी।
