
● वसई
“आओ, गायें रामकथा घर-घर में” आध्यात्मिक आंदोलन की देश-विदेश तक अलख जगाने वाले, मानस के सिद्ध साधक, व्यवहार घाट के ओजस्वी प्रवक्ता और क्रांतिकारी संत प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज के व्यासत्व में बिजेंद्र रामचंद्र सिंह द्वारा 1 मार्च तक वसंत नगरी ग्राउंड, वसई पूर्व में आयोजित नौ दिवसीय मानस महाकुंभ में महाराजश्री ने कहा कि जिनके बारे में वेद ‘नेति-नेति’ कहकर रुक जाते हैं, ऐसे भगवान भी भक्त के वश में हो जाते हैं। भगवान सर्वव्यापी हैं, किंतु लीला वश धराधाम पर पधारते हैं। कहावत है कि अकेला चना भाड़ नहीं भूंजता, इसलिए भगवान भी अपने कार्य को विधिवत संपादित करने हेतु अंशों सहित धरती पर अवतरित होते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण बचपन में ही होता है। बच्चा अपने घर-परिवार से ही सब कुछ सीखता है, इसलिए उसमें संस्कारों की अनिवार्यता होनी चाहिए।
प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने विश्वास व्यक्त किया कि 12 वर्षों के भीतर धरती के सभी कुपात्र आपस में ही भिड़कर नष्ट हो जाएंगे। यदि ऐसे लोग उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेंगे तो बाबा उनकी “सेवा” के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। भौतिक साधनों का त्याग कर जीवन यापन करने वाले योगी आदित्यनाथ का जीवन ही जोग है, जो उन्हें संस्कारों की परंपरा से प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पुत्र की धन्यता भगवान के भजन में है।
महाराजश्री ने कहा कि कथा और जीवन, दोनों में चंचलता नहीं होनी चाहिए। कथा व्यास ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि सातों पुरियां इसी भारतभूमि पर स्थित हैं। इनमें से किसी एक पुरी में भी वास करने से भगवान स्वयं सब कुछ व्यवस्थित कर भक्त को पार लगा देते हैं। भगवान धरती पर लोगों का कल्याण करने आते हैं और कल्याण करते-करते असुरों का भी उद्धार कर देते हैं। ऐसी व्यवस्था केवल भारत में ही देखने को मिलती है।
महाराजश्री ने नामकरण, बाललीला, विद्या-अध्ययन, यज्ञरक्षा और अहिल्या उद्धार के पश्चात गुरु विश्वामित्र के साथ मिथिला प्रवेश का प्रसंग सुनाकर कथा सत्र को विराम दिया।
मानस महाकुंभ में श्रोताओं की अपार भीड़ के बीच नगरसेवक पंकज देशमुख, नगरसेवक योगेश सिंह, जयप्रकाश सिंह, गणेश अग्रवाल, अविनाश मिश्रा, सुरेंद्र सिंह ‘रंधा’, अमित सिंह मास्टर, एडवोकेट जयकार सिंह, एडवोकेट अरुण सिंह, सनी सिंह, अशोका तिवारी, सुधा दूबे, निशा शर्मा, प्रिया सिंह, रेखा गुप्ता, सरिता चौबे सहित कथा की व्यवस्था संभालने वाले प्रिंस बिजेंद्र सिंह आदि गणमान्य जनों ने मानस महाकुंभ में अवगाहन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
