
● नई दिल्ली
देश में प्रस्तावित 16वीं जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों को सही और सटीक जानकारी दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा और उसका किसी भी प्रकार के साक्ष्य या सरकारी योजना के लाभ के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहती है। इसे न तो सूचना के अधिकार (RTI) के तहत साझा किया जा सकता है, न अदालत में प्रस्तुत किया जा सकता है और न ही किसी सरकारी या निजी संस्था को दिया जाएगा। इस डेटा का उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए किया जाएगा।
दिल्ली सहित कई राज्यों में जनगणना का पहला चरण अप्रैल में शुरू होगा। राजधानी में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी। जाति से जुड़े सवालों पर उन्होंने बताया कि यह जानकारी दूसरे चरण में एकत्र की जाएगी और प्रश्नों का निर्धारण व्यापक विमर्श के बाद किया जाएगा।
इस बार जनगणना में एक बड़ा तकनीकी बदलाव भी देखने को मिलेगा। पहली बार ‘स्व-गणना’ की सुविधा शुरू की जा रही है, जिसके तहत नागरिक निर्धारित 15 दिनों की अवधि में डिजिटल माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे पहले डेटा कागज पर एकत्र होता था, जिससे प्रसंस्करण में समय लगता था। अब डिजिटल प्रणाली के कारण आंकड़े तेजी से उपलब्ध होंगे और कई प्रमुख डेटा सेट 2027 तक जारी किए जा सकेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल देश के भीतर रहने वाले नागरिकों के लिए होगी और जनगणना के दौरान किसी प्रकार के दस्तावेज प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। डेटा संग्रहण मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जबकि एक समर्पित वेब पोर्टल पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।
डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संबंधित डेटा केंद्रों को ‘क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर’ घोषित किया गया है। साथ ही, राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR) के अद्यतन पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इसका चुनाव आयोग की किसी प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।
