
● मुंबई
जहीर कुरेशी स्मृति व्याख्यानमाला-5 में साहित्य और कला जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां जुटीं। मुख्य अतिथि प्रख्यात अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘जहीर कुरेशी जीवन को बारीकी से देखने वाले ग़ज़लकार थे। मैं अभिनेता हूँ और मुझे कविताएँ पसंद हैं, इसलिए उनका पाठ करता हूँ। उनकी ग़ज़लें मुझे बेहद प्रिय हैं। वे लिखते हैं-‘किस्से नहीं हैं यह किसी विरहन की पीर के, ये शेर हैं अंधेरों से लड़ते जहीर के।’ ये पंक्तियां एक शायर की प्रतिबद्धता को उजागर करती हैं।’
कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद और शायर ओबैद आज़म आज़मी ने की। उन्होंने कहा, ‘जहीर कुरेशी ने ग़ज़ल को नया मिज़ाज दिया। उनकी शायरी दिलो-दिमाग पर छा जाती है।’ प्रख्यात शायर नवाब आरज़ू और फिल्मकार संदीप नाथ ने भी अपने विचार रखे।
कथाकार और पत्रकार हरीश पाठक ने कहा, ‘मेरे जीवन के कठिन दिनों में वे मार्गदर्शक बने। वे मेरे जीवन का कोमल कोना हैं, उन्हें भूलना मेरे लिए नामुमकिन है।’;‘कथा’, ‘दीनदयाल मुरारका फाउंडेशन’ और ‘जलधारा’ के संयुक्त आयोजन का संचालन विवेक अग्रवाल ने किया। स्वागत भाषण दीनदयाल मुरारका तथा आभार श्रीमती कमलेश पाठक ने व्यक्त किया।
दूसरे सत्र में रचना पाठ हुआ, जिसकी अध्यक्षता नवाब आरज़ू ने की। इसमें राजेंद्र गौतम, अशोक कुमार नीरद, संध्या यादव, अनिल गौड़ और सुभाष पाठक जिया (करेरा, मध्यप्रदेश) ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर विष्णु शर्मा, श्रुति भट्टाचार्य, मंजू श्री, अंजू शर्मा, सुरेश शर्मा, ओमप्रकाश तिवारी, धनंजय कुमार, शैलेन्द्र गौड़, बनमाली चतुर्वेदी, हेमा चंदानी, कमर हाजीपुरी, प्रमोद दुबे, संतोष ओझा, अनिल गलगली, प्रतिमा चौहान और साधना तिवारी सहित अनेक रचनाकार उपस्थित रहे।
