■ कलाची गांव का अनसुलझा रहस्य

● नई दिल्ली
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सुकून भरी नींद किसी विलासिता से कम नहीं लगती। डॉक्टर रोज़ 7–8 घंटे की नींद को सेहत के लिए ज़रूरी बताते हैं, मगर सोचिए अगर कोई इंसान हफ्तों या महीनों तक सोता ही रह जाए—तो? यह सुनने में किसी काल्पनिक कहानी जैसा लगता है, लेकिन कज़ाकिस्तान का ‘कलाची’ गांव इस अजीब हकीकत का जीता-जागता उदाहरण है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गांव में लोग अचानक कहीं भी बात करते हुए, चलते-फिरते या काम के दौरान गहरी नींद में डूब जाते हैं। यहां की स्थिति इतनी विचित्र है कि सोए हुए व्यक्ति को तेज़ आवाज़ भी जगा नहीं पाती। इसी अनोखी वजह से इस गांव को ‘स्लीपी हॉलो’ के नाम से भी जाना जाने लगा है।
जहां एक ओर दुनिया नींद पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं कलाची के लोग जरूरत से कहीं अधिक नींद के शिकार हैं। यह नींद आराम नहीं, बल्कि उनके लिए एक गंभीर समस्या बन चुकी है। कई बार लोग सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर ही सो जाते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर भी खतरा मंडराता रहता है।
वैज्ञानिकों की जांच में इस रहस्य की एक बड़ी वजह सामने आई है। गांव के पानी में कार्बन मोनोऑक्साइड की मौजूदगी पाई गई, जो पास की यूरेनियम खदान से रिसती है। यही जहरीली गैस लोगों को असामान्य और लंबी नींद में धकेल देती है।
हालांकि, इस स्थिति से जूझ रहे लोग खुद भी इससे परेशान हैं। उनके लिए यह कोई वरदान नहीं, बल्कि एक अनचाही और खतरनाक मजबूरी है, जिसने सामान्य जीवन को असामान्य बना दिया है।
