
● मुंबई
गोद लेने की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टता सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा है कि जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) दत्तक ग्रहण से जुड़े मामलों की सुनवाई और अंतिम निर्णय लेने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। अदालत ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2021 में किए गए संशोधन को बरकरार रखते हुए याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया।
यह मामला उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान उठा, जिनमें दो दंपतियों ने 2021 के संशोधन को चुनौती दी थी। संशोधन के तहत गोद लेने के मामलों में अंतिम आदेश देने का अधिकार अदालतों से हटाकर जिला मजिस्ट्रेट और कलेक्टर को सौंपा गया है।
हाई कोर्ट की खंडपीठ जिसमें जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे शामिल थीं, ने स्पष्ट किया कि जिला मजिस्ट्रेट न केवल कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं, बल्कि दत्तक ग्रहण करने वाले अभिभावकों की पात्रता का आकलन करने में भी सक्षम हैं।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि गोद लेने की मंजूरी देना एक न्यायिक कार्य है, जिसे कार्यपालिका के अधिकारियों को नहीं सौंपा जाना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि जिला मजिस्ट्रेट के पास ऐसे मामलों की जटिल कानूनी समझ का अभाव हो सकता है।
हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिला मजिस्ट्रेट जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी होते हैं और उन्हें कानून-व्यवस्था, नीतियों के क्रियान्वयन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का व्यापक अनुभव होता है, जो इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए पर्याप्त है।
