▪️ कच्चे तेल में नरमी से राहत की उम्मीद, पेट्रोल-डीजल सस्ता होने के संकेत

▪️मुंबई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने देश के करोड़ों वाहन चालकों को राहत की उम्मीद दी है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और संभावित समझौते की खबरों के बाद ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड के दामों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इसके बाद केंद्र सरकार और तेल कंपनियां बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें अगले कुछ सप्ताह तक नियंत्रित स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल के दामों में 2 से 5 रुपए प्रति लीटर तक की कमी संभव है। हालांकि तत्काल राहत की संभावना कम दिखाई दे रही है, क्योंकि हाल के पश्चिम एशियाई संकट के दौरान तेल विपणन कंपनियों को भारी वित्तीय दबाव झेलना पड़ा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां पहले अपने नुकसान की भरपाई करना चाहेंगी। पिछले महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 से 8 रुपए प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई थी। अब कच्चे तेल के दामों में स्थिर नरमी बनी रहती है तो उपभोक्ताओं को राहत मिलने का रास्ता खुल सकता है।
केंद्र सरकार पहले ही पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती कर चुकी है, जबकि डीजल पर कर की दरें न्यूनतम स्तर पर हैं। ऐसे में आगे की राहत मुख्य रूप से वैश्विक तेल कीमतों और आयात लागत पर निर्भर करेगी। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की हर हलचल घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के स्तर पर स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी रहती हैं, तो आम उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल सकती है।
