▪️ जानें क्यों माना जाता है अशुभ और किन कार्यों से करें परहेज?

- मुंबई। जुलाई के अंत में शुरू होने वाला पंचक इस बार शुक्रवार से आरंभ हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार से शुरू होने वाले पंचक को ‘चोर पंचक’ कहा जाता है। यह पंचक 31 जुलाई से 4 अगस्त 2026 तक रहेगा। मान्यता है कि इस दौरान धन हानि, चोरी, सामान गुम होने और अनावश्यक आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ सकती है, इसलिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चोर पंचक के दौरान लंबी यात्रा, बड़े वित्तीय लेन-देन, नया व्यापार शुरू करना, महंगी वस्तुओं की खरीदारी और महत्वपूर्ण निवेश जैसे कार्य टालना बेहतर माना जाता है। यदि ऐसे कार्य करना आवश्यक हों तो शुभ मुहूर्त या विशेषज्ञ की सलाह लेने की परंपरा है।
पंचक 5 दिनों की वह अवधि है जब चंद्रमा अंतिम पांच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती) से गोचर करता है। यह अवधि शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती है। पंचक की शुरुआत के दिन के आधार पर इसे रोग, राज, अग्नि, मृत्यु और चोर पंचक कहा जाता है।
- जानिए विस्तार से –
- रोग पंचक: यह रविवार को शुरू होता है। इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ और शारीरिक कष्ट बढ़ने का खतरा रहता है।
- राज पंचक: यह सोमवार या बुधवार को शुरू होता है। इसे शुभ माना गया है; इसमें सरकारी कार्यों में सफलता और मान-सम्मान मिलता है।
- अग्नि पंचक: यह मंगलवार या गुरुवार को शुरू होता है। इस अवधि में आग, दुर्घटना या मशीनरी और निर्माण कार्यों से जुड़ा खतरा रहता है।
- चोर पंचक: यह शुक्रवार को शुरू होता है। इसमें धन हानि, धोखाधड़ी या व्यापार में नुकसान का डर रहता है।
- मृत्यु पंचक: यह शनिवार को शुरू होता है। इसे सबसे ज्यादा अशुभ और खतरनाक माना गया है, जिसमें जोखिम भरे कार्यों और दुर्घटनाओं से बचने की सलाह दी जाती है।
