
▪️मुंबई। मालाड पूर्व स्थित दत्त मंदिर रोड के शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल में अखिल ब्रह्मविज्ञान संस्थान, मुंबई एवं राजभाषा हिंदी प्रचार संस्थान, मुंबई द्वारा शारदा ज्ञानपीठ इंटरनेशनल स्कूल, मालाड के सौजन्य से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में विराट कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता आत्मनिर्भर भारत अभियान संगठन, मुंबई के कार्याध्यक्ष रामकुमार पाल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने जातिवाद और भाषावाद से ऊपर उठकर सनातन एवं राष्ट्रवाद को अपनाने पर जोर दिया। स्वागताध्यक्ष भाजपा नेता अमित ओमप्रकाश दुबे ने वर्तमान समय में सभी को एकजुट करने का संदेश दिया। विशिष्ट अतिथि उत्तर भारतीय संघ, मुंबई के महामंत्री देवेंद्र कुमार तिवारी ने भी इस साहित्यिक समारोह की सराहना की।
अतिथि श्रेया लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड के अनिल कुमार मिश्रा ने हिंदी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी धनार्जन की भी भाषा है और इसे बोलने में किसी को हिचकना नहीं चाहिए।
समाजसेवी एवं शिक्षाविद् चंद्रवीर बंशीधर यादव तथा गुरुकुल की संचालिका प्रीति शर्मा को शाल, सुमन स्तबक, स्मृति चिह्न एवं ‘राष्ट्रभाषा सेवा सम्मान’ प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। सरस्वती वंदना कवयित्री डॉ. रोशनी किरण ने प्रस्तुत की। राजभाषा हिंदी पर व्याख्यान डॉ. श्रीभगवान तिवारी एवं विजय पाण्डेय ने दिया। प्रथम सत्र के सम्मान समारोह का संचालन संस्था के अध्यक्ष आचार्य रामव्यास उपाध्याय ने किया।
विराट कवि सम्मेलन में कविवर राम सिंह, कुसुम तिवारी, डॉ. रोशनी किरण, विवेक सिंह, नीतू पाण्डेय क्रांति, वाचस्पति तिवारी, राजेश दुबे ‘अल्लहड़’, रामस्वरूप साहु, मृदुला महक, एड. राजीव मिश्र, कल्पेश यादव, प्रो. विजयनाथ मिश्र, सुमित्रा गुप्ता, अरुण दुबे ‘अविकल’, एड. विजय पाण्डेय, डॉ. दिनेश वर्मा, रवि यादव, रीता कुशवाहा, रीना राय, श्रेया दुबे एवं जितेंद्र चौबे आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन का कुशल संचालन संस्था के महामंत्री डॉ. अवनीश सिंह ने किया।
कार्यक्रम का संयोजन शिक्षाविद् आर.के. सर, बंशीधर दुबे, रमेश दुबे, प्रभाशंकर शुक्ल, सुजीत दुबे आदि ने किया।
पिछले महीने संस्था ने अपने दो उच्च पदाधिकारियों चंद्रिका राय, पूर्व प्राचार्य डॉन बॉस्को स्कूल एवं कोषाध्यक्ष, महापंडित राहुल सांकृत्यायन फाउंडेशन तथा जनार्दन मिश्र, कोषाध्यक्ष, अखिल ब्रह्मविज्ञान संस्थान को खो दिया। उनकी आत्मा की शांति के लिए समारोह के अंत में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
